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Sonu Sood

Sonu Sood

Indian actor and film producer

Feb 18, 2026

7:37
Yes and we'll, you know, we'll touch on a lot of topics and but इसके लिए मुझे आप जैसे बंदे ही चाहिए जो humanity के बारे में सोचते हैं। क्योंकि बहुत सारे लोग अपने बारे में सोचते हैं, humanity के बारे में नहीं सोचते हैं। तो let me actually start the question by asking you a very simple question from 2020 जब COVID हुआ था, breakdown हो गया था। सारा system बंद हो गया। लेकिन आपका system बंद नहीं हुआ। वो क्यों?
8:09
भाई मुझे लगता है कि हम जो भी करते हैं, आज भी अगर हम लोग साथ में बैठे हैं तो ये बहुत समय पहले तय हुआ था। It was planned that today we are going to sit together and talk about our experiences and I think whatever I could do in pandemic was planned by Almighty कि तकलीफें आएंगी but मेरा हाथ ऊपर वाला थामेगा ताकि मैं दूसरों का हाथ थाम सकूं। वो बड़ा important था and I feel मैं नहीं कर रहा था। There was a force that was helping me do what I was doing.
8:48
मुझे नहीं पता था कि लोगों को घर कैसे भेजना है। मुझे नहीं पता था कि trains की permissions कैसे लेनी है, flights की permission कैसे लेनी है, buses की permissions कैसे लेनी है और सीखते-सीखते बहुत दफा fail हुआ, बहुत दफा कामयाब हुआ। लेकिन उस दौरान करीबन साढ़े 7 लाख लोगों को घर भेजा। पूरे अलग-अलग districts, अलग-अलग शहरों में, states में बहुत जगह permissions बनती क्योंकि Mumbai से ज्यादातर जो buses और trains थी वो दूसरी states में ban थी। वो आने नहीं दे रहे थे। फिर थोड़ा सा political tensions भी थी कि अगर aligned नहीं है government से वो उस state से लोग आने नहीं देते। तो वो एक challenge होता था। But बोलते हैं कि जब emotions की सवारी आप पे आप ride करते हो फिर आप खुद ब खुद अपने formulas बनाते हो। मुझे याद है I used to speak to a lot of bureaucrats in different states, nodal officers जिनसे permissions लेना होता था और मैं बहुत तगड़े तरीके से follow up करता था। कोई you know SP हो, collectors हो, you know secretaries हो, उनके offices के बाहर जो readers होते थे, जो permissions का paper लेके होते थे, मैं उनसे भी touch में रहता था कि कब वो bureaucrat paper sign करेगा ताकि ऐसा ना हो sign करने के बाद दो घंटे उसके table पे पड़ा रहे। तो जैसे ही उसने sign किया तो reader जो वहां पे उस office में clerical job करता है वो देखता था कि हां sign हो गया है। और मेरा एक आदमी उसी office के बाहर एक bike लेके खड़ा रहता था कि अरे sign होके reader तुरंत उसको देगा और फिर वो लेके पहुंचेगा। और बहुत दफा ऐसी buses चलती थी जिनमें paper physical form में आपके हाथ में नहीं आया था। पर ऐसे पता था कि चार घंटे बाद आएगा तो हम निकाल देते buses और हर एक bus वाले के पास मेरा mobile number होता था और एक bus वाले का एक मैं leader बनाता था कि भैया आज जब UP जा रहे हैं, Andhra जा रहे हैं, Telangana जा रहे हैं, तुम एक बंदा इस bus का leader ये रामू है। इस bus का leader मोनू है। भैया अगर कहीं पे किसी state में आपको रोका किसी you know forces ने तो आप मुझे video call कीजिएगा and I will try to get you out of the system.
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So वो automatically हो रहा था। मुझे पता नहीं था कैसे हो रहा है। But I realized कि हम अपनी निजी जिंदगी में भी बहुत दफा ऐसी चीजें करते हैं जहां पर हम fail होते नहीं कर पाते और फिर हम छोड़ देते हैं उस चीज को। Biggest lesson was कि छोड़ना नहीं, लगे रहना है और फिर ऊपर वाला खुद ब खुद रास्ता दिखा देता है।
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Right and तो लेकिन अब आप मुझे यह बताइए कि यह जो सेवा का भावना है, यह spiritual है या यह आपके family में था या आप आपको खुद आया है यह जागृति।
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मेरी mother एक बड़ी कमाल की line कहा करती थी कि आप अपनी जिंदगी की कलम में दुआओं की स्याही डाल लें। फिर देखें आपका नाम पन्नों पर नहीं आसमान पर लिखा जाएगा। तो जब दुआएं जो होती हैं वो बहुत कमाल की चीज होती है। वो आपसे कुछ भी करवा सकती हैं। आप बोलोगे कि मैं यह पर्वत हिलाना चाहता हूं तो लोग हँसेंगे यार कहां से हिला लेगा। फिर अगर दुआएं जुड़ जाएंगी तो वो भी आप हिला दोगे। So वो एक biggest lesson है जिंदगी का। आपको पता नहीं आप कैसे करते। मुझे याद है कि medical students बाहर फंसे हुए थे छह countries में जिसमें Kirgistan, Kazakhstan, Uzbekistan, Georgia, Philippines and Russia करीबन साढ़े बारह हज़ार students हैं तो उनको भी हम लेकर आए। मतलब नामुमकिन था कि flights तो land करने ही नहीं दे रहे थे बाहर की countries की India की खासकर। फिर मैंने चलो भागदौड़ किया। ईश्वर ने रास्ता दिखाया और मैं पहले country से 169 बच्चों को निकाला बाहर और फिर बाकी countries में spread होगा कि सोनू help करता है और निकालो और फिर निकाल भी पाए उनको सब students आए। बड़े खुश हुए। आप सोचिए कि जब उनको निकाला बच्चों को उन बच्चों को तो निकाला। लेकिन मुझे पहली दफा पता चला कि जितनी Philippines में रहने वाले infants जो बच्चे छोटे हैं, उनकी जो liver transplant surgeries होती है, बहुत सालों से India में होती हैं। उनके बच्चे की liver जो donor होता है और उसके parents होते हैं तो तीन लोग मिलकर India आते हैं। उनकी surgeries होती है जिसमें 8-10 महीने से लेकर 7, 8, 10 साल के बच्चे जो होते हैं उनकी Apollo Hospital Delhi में होती थी और जब pandemic हुआ तो वो भी बंद हो गई flights आने के लिए। तो जब मैंने Philippines से वो बच्चे निकाले तो उसकी government में कुछ officials ने मुझे connect किया कि बच्चों की surgeries करवानी है। आपने अपने students को निकाल दिए। ये Filipino जो बच्चे हैं इनको भी पहुंचाना जरूरी है। तो 42 cases थे into 326 लोगों को निकालना था। मैंने भागदौड़ शुरू की। Hospital से touch में आया। Hospital वाले बोले कि हम नहीं ला सकते। आप लेकर आइए, हम surgeries करेंगे। अब विश्वास मानिए भाई, छह दिन लगे मुझे लाने के लिए। उसमें तीन बच्चों की death भी हो गई। तो 39 बच्चे बचे उसमें और उनके साथ में दो जो एक donor और उसके parents में से और हम उनको यहां पर लेकर आए। उनकी surgery हुई। वापस होकर ठीक होकर गए Apollo Hospital से और मैं फिर मुझे वहां पर भी उन्होंने Philippines में बुलाया कि हम honor करना चाहते हैं government की तरफ से। So मैं आज तक उन लोगों से मिला नहीं। मेरी कुछ parents से तब बात हुई जब वो India आए थे और अभी भी कई बार वो touch करते हैं। मेरा phone है तो message करते रहते हैं। So मैं यह realize करता हूं कि इतने साल हो गए आज उनके जब birthdays होते हैं, जब उनके कुछ होते हैं तो उनकी photographs भेजते हैं उन बच्चों की कि आज बच्चा तीन साल का हो गया, पाँच साल का हो गया। सात साल जो भी हो गया whatever तो वो जब मैं देखता हूं तो मुझे इतनी खुशी होती है वो देखकर कि यार मैं वो कर पाया। शायद वो मेरे से message miss हो गया होता। शायद मैंने सोचा था कि यार ये कैसे possible है। मैं शायद छोड़ दिया होता उस चीज को। So मैं नहीं छोड़ा और ईश्वर ने वो रास्ता दिखाया और हम कर पाए। आज वो parents के पास उनके बच्चे हैं। वो बड़े होंगे। शायद जब 20 साल बाद 25 साल बाद मां बाप बताएंगे कि ऐसा हुआ था। So I think आप उनकी जिंदगी उस परिवार का हमेशा हिस्सा बन जाते हैं। तो इसलिए बनते हैं क्योंकि कहीं ना कहीं आपको बचपन से वो सीख दी गई मुझे। मेरे mother Professor Saroshuddin सारी जिंदगी बच्चों को पढ़ाते रहे। उनका एक ही मकसद था कि बच्चे पढ़ानी है। Generations बदल जाएंगे अगर बच्चों को पढ़ाए। मेरे father की कपड़े की shop थी। वो हमेशा लंगर लगाते थे shop के आगे। तो मुझे लगता है कि जो सीख थी तो वहीं से शुरू हुई थी। कहीं ना कहीं वो बचपन से ही वो lesson feed होता गया और फिर जब करने का मौका मिला तो उनका आशीर्वाद था जो करवा पाया।

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