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Kanit Khalilullah

Chartered accountant, economist and public policy expert; Co-Founder & Director at Univision Consulting; former Executive Vice President at Ufone and Head of Internal Audit at Unilever Pakistan.

Jul 31, 2026

15:28
Now are we going to say कि यार gold is also a wrong currency and should we not differentiate between trading which may be wrong because वो एक speculation है और उसको कर रहे हैं and genuinely holding certain things as a store of value जो कि stock market में भी होता है कि there are speculators, there are people जो up and down करते हैं। अब हम stocks को इतनी हराम कर सकते हैं।
15:51
देखिए इसमें आपने जो हम basically देख रहे हैं कि currency जो है currency का basically काम जो बात हुई कि वो medium of exchange है। यानी अगर आपने currency रखी है और उससे आप कमा रहे हैं money पर money कमाना ही basically riba या interest है ना कि जो हम जो basic definition है। तो जो gold की currency जो gold की बात करें तो gold as a currency तो मेरे ख्याल 15वीं 16वीं सदी के बाद use नहीं हुआ। उसके बाद अगर यह use होता भी रहा है तो gold standard use होता था। Gold standard यह था कि आप 10% gold रखें और उस पर जो है वो कोई 10 times receipt create कर दे और जैसे आप IOUs कहते हैं और उसके through यह समझे आप 1933 तक जो है वो America में internal और 73 तक जो है वो कुछ fiat का भी रहा। तो इसको आप currency के तौर पर तो नहीं कह सकते, gold standard की बात कर सकते हैं। और इसी तरीके से Bitcoin की भी बात अभी हो रही है कि Bitcoin currency के तौर पर use नहीं हो रहा। यानी currency का जो main काम है कि यह एक medium of exchange है, उससे आप चीजें खरीदें। जो असल में Islam की जो अगर हम Islam के हवाले से देखें, economics दोनों के हवाले से देखें तो medium of exchange यह होती है कि जिससे आप चीजें खरीदें। Imam Ghazali के अल्फाज में mirror है। इसकी अपनी value नहीं है, दूसरे की value दिखा रहा होता है। तो इन दोनों चीजों के अंदर ना gold ना Bitcoin currency के तौर पर तो use नहीं हो रहा। Bitcoin का तो मैंने बताया एक survey America में हुआ है कि 2% से ज्यादा उनकी transaction के लिए use नहीं हो रहा। वो value बढ़ाने के लिए या speculation जिसे आप कहेंगे रखने के लिए use हो रहा है। अच्छा दूसरा इसमें जो बात आपने बड़ी अच्छी बात की कि देखें हमने भी हमारा भी इस book के हवाले से और generally यही बात है कि Mufti साहब ने जो है Bitcoin पर तो एक बात की कि जी माल नहीं है और उसके ऊपर बात की। लेकिन Pakistan में जो transaction Bitcoin से हो रही होंगी वो शायद half a percent भी नहीं हो रही होंगी। लेकिन जो total elephant in the room है जो 90% से ज्यादा जो transactions हो रही हैं bank money के through वो एक बड़ा खतरनाक system है जो हमने book में भी discuss किया है कि आप fractional reserve banking के through आप money create करते हैं और उस money के through के में क्या होता है कि एक side पर कर्जे बढ़ते जाते हैं। दुनिया भर के अंदर कर्जे बढ़ रहे हैं। हर बंदा हर यानी आपको तो पता होगा West के अंदर तो हर गाड़ी, हर मकान। ये शायद 70 80 साल पहले लोगों के अपने थे मकान। अब वो सब mortgages पर जा चुके हैं और दूसरी side जो है वो inflation हो रही है। Inflation जो है वो उसको भी count करने के लिए उन्होंने तरीके बना दिए हैं कि जैसे आप Bitcoin को तो हम कहें कि मैंने अभी तो recently तो बड़ी price गिरी है $120,000 से वो $60,000 पर आ गया था। तकरीबन 50% उसकी price छह आठ महीने में गिर गई। तो वो फिर उसने Elon Musk ने वो उसने कोई tweet कर दिया तो उसके बाद और थोड़ी वो गिर गई। तो speculative तो वो ज्यादा है। लेकिन अगर आप dollar को देखें तो inflation में उसमें दो दिखाते हैं तीन चार percent लेकिन actually Pakistan में थोड़ा ज्यादा है। लेकिन America Europe में बहुत सारे पैसा जा रहा है mortgages के अंदर। तो मकानों की कीमतें इतनी बढ़ गई हैं कि वो पैसा inflation में count नहीं हो रहा होता। Although उसे inflation हो रही होती है। तो मेरा हमारा इसमें view यही है कि जो हमने book में भी बात की कि देखें Bitcoin और gold को तो आप ले लें कि वो तो currency के तौर पर use ही नहीं हो सकते ना। अच्छा currency के तौर पर use नहीं होने का दूसरा मसला यह है कि जो currency है वह public good है। जैसे आप कहते हैं ना कि defense जो है वह public good है। इसमें आप लोग नहीं देते कि भाई तुम Malaysia अपने बना लो। अगर आप इजाज़त दे दें कि भाई हर बंदा तो हर बंदा अपनी Malaysia बना ले या आप ports को कहते हैं कि public good है या आप कहते हैं कि infrastructure खास तौर पर उन इलाकों में पहुंचाना जहां गरीब लोग हैं, वह public good है। तो उसी तरीके से money जो है वह एक public good है जिसके अंदर जिसको आप private sector के हवाले नहीं कर सकते। इस वक्त 90% तो हमने देखा कि banking के हवाले हुआ हुआ है। वह money create कर रहे हैं fraction reserve से और उससे कर्ज़े बढ़ रहे हैं एक side पर, एक side पर महंगाई हो रही है। और फिर यह कि यह पैसा जो है वह इसे Cantillon effect कहते हैं कि पैसा किनके पास जाता है? यह पैसा आम लोगों को benefit नहीं करता। यह पैसा जो है सबसे पहले financial sector के पास आता है और फिर बड़े अमीर लोगों के पास जाता है। Elon Musk ने अभी जिसके पास एक trillion dollar की दौलत अभी touch की थी, अब तो थोड़ा नीचे आ गया है वह। उसने अभी एक mansion खरीदा तो वह भी bank के पैसे से खरीदा। क्योंकि उसे मालूम है कि भाई पैसे की कीमत तो गिर जानी है और अपने महल की कीमत बढ़ जानी है। तो यह पैसा जो है जाता किन लोगों के पास है? यह जाता है अमीरों के पास और उससे जो है क्या होता है कि जो assets की कीमतें बढ़ती हैं। पाकिस्तान के अंदर हमने पिछली दफा भी बात की थी कि पाकिस्तान ने पिछले तीन सालों के अंदर एक Dawn में report आई थी कि 98% जो बैंकों ने additional loan दिया है, वह सिर्फ government को दिया है interest वापस करने के लिए। तो या तो वह कहाँ डालते हैं वह पैसा या तो वह government को दे देते हैं। क्योंकि वह उनके पास जो पैसा होता है वह short term होता है ना। यानी उनके पास ऐसा होता है कि आप शाम को निकाल लें। उनके पास जो पैसा होता है वह होता भी risk free होता है तो वह government को दे देते हैं या फिर बड़े अमीर लोगों को देते हैं real estate पर डालने के लिए जो West में हो रहा है। तो अब मसला यह है कि यह जो fraction reserve banking system है, वह शायद ज्यादा stable हो। क्या कहते हैं Bitcoin के मुकाबले में इतना मतलब उसमें fluctuation नहीं है। 5-10% की fluctuation बड़ी समझी जाती है। लेकिन यह जो कर्ज के साथ money create हो रही है, यह एक बहुत बड़ा मसला है। क्योंकि अब देखें ना कि अगर हम पाकिस्तान के context में देखें कि हमारा जो domestic debt है, वह पिछले 15 सालों में 5 trillion से 55 trillion पर चला गया है। और इस वक्त तकरीबन 60% जो आपका tax है, जो आप बेचारे ज्यादातर तो गरीबों से ही ले रहे हैं sales tax में, वह आप interest में दे रहे हैं और वह interest कहाँ जा रहा है? वह बैंकों के हाथों में जा रहा है। तो यह आपकी बात बिल्कुल सही है कि fraction reserve banking से जो money create हो रही है, वह जो काम होना चाहिए money के काम के, जो public good के तौर पर काम होना चाहिए, वह नहीं हो रहा। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि gold की तो आप currency use ही नहीं कर सकते। Pakistan में अगर आप gold देखें तो 90% gold जो है वो क्या होगा? औरतों के जेवरात में होगा। और क्या कहते हैं जो gold होगा, अगर आप currency to gold value भी देखें तो currency इस वक्त आपकी 40 trillion की है। Gold तो इतना नहीं हो सकता, जाहिर है बहुत कम होगा इसके मुकाबले में। तो इसका मतलब यह है कि आप fraction reserve banking की बात करें तो वो फिर वही मसले होंगे जो अभी हो रहे हैं। तो उस लिहाज से यानी अगर हम यह आपकी बात मेरे ख्याल से बिल्कुल ठीक है कि current system में खराबी बहुत है और उसमें एक तरफ महंगाई, एक तरफ कर्ज़ा, financial instability, economic instability उसके मसले ये सारे हैं। लेकिन उसका हल क्या cryptocurrency है? उसका cryptocurrency इसलिए नहीं है कि cryptocurrency तो बिल्कुल ही जो रियासत एक public good को कहता है कि भाई एक computer software बनाएगा और वो mining करेंगे। एक payment की verification पर अगर आप कहें कि क्या कहते हैं banking तो इस वक्त आपने मिसाल दी banking की, लेकिन banking से 90% transaction हो रही हैं। उसमें इधर से मैं आपको payment कर दूं, आप उधर से payment कर दें, ease of payment भी है। फिर भी सारी banking की अगर आप वो मिला लें कि भाई उसमें कितनी बिजली खर्च हो रही है तो उसके मुकाबले में Bitcoin की जो mining है वो बढ़ती जा रही है। आपको पता है इसमें नए से नए computers आ रहे हैं, आपको लगाने पड़ते हैं। फिर अभी लोग कह रहे हैं कि quantum computer आ जाएंगे तो Bitcoin की private key को जाकर तोड़ देंगे तो security का भी मसला है। तो मेरा यह ख्याल है कि ना gold मसले का हल है इस वक्त, ना Bitcoin मसले का हल है। मसले का हल यह है कि जिस तरह से जो हमने इस book में बड़ी तफसील से इसकी बयान किया है कि fraction reserve से आप full reserve banking पर जाएं, रियासत की money पर जाएं। इस वक्त जो है वो पिछले अभी मैं पिछले दिनों देखा था उसमें किसी documentary में कि उनसे सवाल पूछा उस साहब से कि मुफ्ती साहब ने मना किया है Bitcoin को कि यह जो है गलत है तो आपके bank currency के बारे में क्या ख्याल है? तो एक और मुफ्ती साहब थे जो उनके supporter थे। उन्होंने कहा कि यह इसलिए जायज है कि रियासत इसको इसकी पुश्त बना कर रही है, पुश्त बनाई कर रही है। रियासत ने इसको वो किया हुआ है। लेकिन यह बात वो लोग नहीं समझ रहे कि रियासत इसको जो control कर रही है, वो interest rate के through control कर रही है। और वो interest rate ऐसे हैं कि अगर वो ज्यादा हो तो वो employment तबाह कर देते हैं। कम हो तो उससे money create होती है और दौलत concentrate होती है। कोई Goldilocks interest rate नहीं है इस वक्त। आप interest rate पाकिस्तान में कम करते हैं, दौलत concentrate होनी शुरू हो जाती है क्योंकि उससे money की supply बढ़ी, asset की prices बढ़ी। बढ़ाएं, आपकी employment तबाह हो जाएगी। तो बात यह है कि यह जो रियासत को यह जो ताकत है और आपको बताऊं कि तारीख में हमेशा रियासत ही money create करती रही है। यानी stamping होती थी coins के ऊपर भी। यह नहीं होता था coin general है और बादों-बाद उसकी intrinsic value उतनी नहीं होती थी। उस पर stamping होती थी। यह कोई 100 सालों के अंदर ज्यादा हुआ है कि यह पूरी power हमने उठाकर commercial banks को दे दी है कि वो money create करें। तो इसको तो ठीक होना चाहिए। यानी इसमें कोई बात ही नहीं है कि अगर आप यह नहीं करेंगे तो आप और आगे बढ़ते जाएंगे। किसी बड़े मशहूर economist ने कहा कि "If you fix the money, you fix the society" उसे economic कहा कि भाई economy और इब्ने खल्दून का भी वो था कि अगर आपने currency को तबाह कर दिया तो आप पूरी society को तबाह कर देते हैं। कितने मशहूर वो हैं। तो यह आपकी बात बिल्कुल ठीक है कि जो current system है वो तो तबाही वाला है। पाकिस्तान के लिए खास तौर पर हमारा तो बिल्कुल आपको पता है कि पहला दिन शुरू होता है। हमने 60% सूबों को दिया, 60% interest दिया और फिर कर्ज़े लेने शुरू कर दिए और उससे कर्ज़े लेने से मुझे और आपको नुकसान नहीं पहुंचेगा। लेकिन वो जो fixed income पर लोग हैं वो तबाही में आ जाते हैं क्योंकि जितनी आप कर्ज़े लेंगे उतनी money की supply बढ़ेगी। तो मेरा ख्याल है कि आपकी यह बात बिल्कुल ठीक है कि current system को तबाह है, लेकिन उसका हल किसी तरह भी Bitcoin या सोना नहीं है।

5 MINS LATER

29:56
अमीर आदमी पैसे बना रहे हैं। गरीब आदमी कौन सोचता है?
30:00
देखिए, मैं आपको बताऊं आपको कि इसका इसका वजह क्या है? जो 31 trillion से जो आप 46 trillion कह रहे हैं। हर महीने Government of Pakistan जाती है बैंकों के पास। हर महीने। यह हर महीने की बात है। 500 billion रुपए loan लेती है और वह interest में वापस करती है। मतलब एक हाथ से आपने loan लिया और अगले हाथ से interest में वापस किया। जब वह interest या जैसे आप profit कहें, वह बैंकों के accounts में जाता है। उसमें ज्यादातर बैंकों के accounts में जाता है। Islamic bank शायद 8% दे रहे हो। Commercial bank कुछ दे रहे हो तो तकरीबन उसमें से 80% banking accounts में जा रहा होता है। उससे क्या होता है? महंगाई होती है। और वह महंगाई जो है, हमने पहले बात की है। गरीब आदमी को मारती है। Inflation सबके लिए नुकसानदेही होती है। और कर्जा हम अगली generation पर चढ़ा रहे हैं। यानि जो 500 billion का हर महीने कर्जा है। अब आप सोचें कि 500 billion को मैं आपके viewers के लिए जो है वो करता हूँ कि compare आप करें कि लाहौर, इस्लामाबाद और पेशावर की तीनों metro buses मिला लें तो उस पर जो खर्चा हुआ है वो 500 billion शायद होगा। या Ehsaas या BIC program है उसका खर्चा 500 billion है। ये हर महीने हो रहा है। इसकी वजह क्या है? इसकी वजह यह है कि Government of Pakistan का जो इस वक्त जो कर्जा है वो 55 trillion पर पहुंच चुका है। लोग यह समझते हैं कि जो है यह कर्जे का interest पाकिस्तान से बाहर जा रहा है। आपको हैरानी होगी कि इस दफा budget में जो interest है, जिसे आप debt servicing ना कहें, कर्जा वापस नहीं कर रहे। जो interest दे रहे हैं वो 8000 billion है, उसमें 7000 billion local debt के ऊपर है, local कर्जे के ऊपर। जो आप बताओ 500 billion जा रहा है हर महीने, वो 6-7 हजार billion बन जाता है। तो यह कर्जा बैंकों के पास जा रहा है और बैंकों के पास, बैंकों के खातेदारों के पास जा रहा है। तो जो Government of Pakistan, federal government का जब पहला दिन शुरू होता है तो उसे 60% देना होता है सूबों को। 18वीं तमीम आपको पता है कि education, health, यह जो law and order है, ज्यादातर उनके पास, अभी बड़ी लड़ाई भी चल रही है कि उसमें से कम किया जाए। और उसके बाद वो देना तो है। उसके अलावा उन्हें 50 से 60%, तकरीबन वो उनकी जो tax revenues हैं उसका वो interest देना पड़ता है उन्हें। 50% आप लगा लें। तो वो चले जाते हैं minus 10% पर। अब जब minus 10% के ऊपर शुरू हुआ इसका मतलब यह है कि हर जो कोई वो खर्चा कर रहे हैं, कोई road बना रहे हैं, कोई defense पर खर्चा कर रहे हैं, pension दे रहे हैं, government के अपने लोग दे रहे हैं, government के अपने लोगों को तनख्वाह दे रहे हैं, ये सब कर्जे के through कर रहे हैं। और जो interest का खर्चा है वो defense के मुकाबले में तीन गुना ज्यादा है इस वक्त। defense का खर्चा जो है 15% है हमारे tax का, interest का खर्चा 45% हो गया है जो हमारे खर्चे का वो है। और government के अपने खर्चों के मुकाबले में शायद ये सात गुना ज्यादा हो और जो बेचारे गरीबों को दे रहे हैं। तो यह system तो नहीं चलने वाला। ठीक है ना? ये system तो चलने क्या मतलब इसी तरह से महंगाई चलती रहेगी 15% महंगाई। पिछले 50 सालों में पाकिस्तान में हर साल जो money supply बढ़ी है वो 15% के हिसाब से बढ़ी है जो तकरीबन 1200 गुना बन जाती है। Excel पर जब डालते हैं तो लगता है compounding का कितना impact है कि 1200 गुना बढ़ गई और actual जो production बढ़ी है वो सिर्फ 9-10 गुना बढ़ी है। जिसे आप goods की production कहते हैं तो हर चीज 100 गुना महंगी हो गई है। तो यह मसला तो चले जा रहा है, यह हो रहा है। अच्छा इसका हल क्या है? इसका हल यह है कि अभी आपने यह जो money का जो system था वो आपने private sector के हवाले कर दिया है और वो money create कर रहे हैं और वो जाहिर है चाहते हैं, हर bank यह चाहता है ज्यादा से loan issue करे। जब government मांग रही हो तो उनके लिए तो बड़ा ही फायदा होता है। Risk free है। आप जाकर लो हमसे deposit और government को जाकर जमा करा दो। कोई risk भी ना लो और यह वो करते रहते हैं। तो अब यह जो system जिसके अंदर आप fractional reserve के अंदर, जो banking system में आ गए, government के पास facilities खत्म हो गए और यानी उनके पास पैसा ही, जब minus 20% से शुरू करेंगे, आप सोचें ना आपके घर में आपकी salary आई और salary में अगर 100 salary है तो उसका अगर आपको 120 आपको पहले दिन ही खर्च कर देना है तो आप कर्जा ही लेंगे, जो कर रहे हैं आप। कर्जे का मतलब महंगाई है। यह जो currency बढ़ रही है, जो आप कह रहे हैं 31 trillion से 46 trillion, मैंने आपको बता दिया हर महीने 500 billion का खेल है यह। क्या आप कर्जा ले रहे हैं, interest वापस कर रहे हैं, money की supply से आप गरीब माना जा रहा है और कर्जा हम अगली generation पर डालेंगे क्योंकि और आप सोचें ना कि हम कैसी वो हैं कि अपने कोई बाप अगर अपने बच्चों पर कर्जा डाल रहा हो जिसका उसे बस को कितना खराब कहते हैं। हम as a generation अपनी अगली generation को डालते जा रहे हैं। अच्छा अब इसका सिलसिला क्या है? इसका सिलसिला यह है कि यह आप नहीं है कि government के हाथ में है, यह commercial बैंकों के हाथ में है और government या state जो है उसको interest rate के through control करने की कोशिश करती है। पाकिस्तान में कामयाब क्यों नहीं होता? आपको पता होगा पिछले दिनों हमने interest rate हमने 20% तक लेकर गए थे। 6-7% से वो सारा private sector की हालत खराब हो गई थी। जो उन्होंने projects लगाए थे 7% पर वो सब unviable हो गए। लेकिन उसके बावजूद भी money supply कम क्यों नहीं कर सके? उन्होंने तो वापस किए पैसे। मगर government ने और interest देना था ज्यादा, उन्होंने और कर्जे लिए और money supply बढ़ती रही जो आपने अभी number बताया। तो इसका हल यह है, इसका हल यह है कि वो आप जो money, जो public good है उसको आप रियासत के पास वापस लें। रियासत के पास वापस लेने का मतलब यह है कि जो money creation की power है आप banking bank से करवाएं, बहुत अच्छी बात है। लेकिन यह कि banking को यह नहीं होना चाहिए कि वो numbers में money create करे 5% रखकर। तो तीन बातें इसमें अगर आप कर लें तो पाकिस्तान इन मसैलों से निकल सकता है। पहली बात तो यह कि private creation of money जो commercial banks की है वो आप खत्म कर दें। देखें इस वक्त हम Bitcoin की जो भी बात कर लें, सोने की बात कर लें, वो half a percent से ज्यादा transaction नहीं है उसमें और वो होंगी भी नहीं। इसलिए कि लोग उससे transaction नहीं करते, उसको वो किसी और मकसद के लिए रखते हैं। Investment के लिए रख लिया, कोई और काम कर लिया। यह अभी हम हराम-हलाल की बात हम नहीं करते। मेरा public interest का मामला है। दूसरी तरफ मैंने कोई और बात की, आपने उसको कहा कि innovative है। लेकिन यह जो भी है, यह transaction के लिए use नहीं हो रहा। यानी 90% या 100% transaction, जो 99% transaction हो रही हैं, वो legal tender में हो रही हैं जो रुपए हैं। अच्छा वो जो रुपए हैं उसको जब तक आप सही से state के हवाले नहीं करेंगे, private sector को आप मना कर दें money create करने का, उसका तरीका दो तरीके हो सकते हैं। बड़े आसान तरीके हैं। आप तो technology के जाहिर है कि हमसे ज्यादा आपको पता है। एक चीज हो सकती है कि जो सारा, जो हमारे और आपके सारे account state bank के अंदर हों। ठीक है? और उसमें आप बड़े-बड़े servers लगा दें, बड़ी-बड़ी वो जो है वो लगा दें। उसमें सारी जैसे मैं hard currency state की use कर रहा हूँ, soft currency भी state की use करूं। अच्छा उसमें जाहिर है मसले यह हैं कि आप innovation तबाह कर देंगे, जो private sector के पास innovation करती है, वो payment को fast कर रही है। और क्या कहते हैं, West में एक बड़ी बात यह हो रही है कि surveillance भी कर सकते हैं, वो आपकी हर payment को check करना शुरू कर दें। नहीं? और अगर आपसे लड़ाई हुई तो आपको payment system से बाहर फेंक दिया उन्होंने। तो इसका बड़ा innovative तरीका या जिसका बड़ा कहना चाहिए कि seamless method यह है कि आप full reserve banking पर चले जाएं। कि मेरे bank में जितने पैसे पड़े हुए हैं, अगर हमारे Habib Bank में 105 trillion के deposits हैं, Mizan के अंदर शायद 4 trillion के deposits होंगे। तो उन्होंने अभी सिर्फ 5% cash रखा हुआ है ताकि मैं और आप जाएं तो ATM से निकाल लें और 5% उन्होंने state bank में रखा हुआ है। Full reserve banking यह कहता है कि भाई आप total का total जो है 5% cash तो रखा है, आपका state bank में account 95% होना चाहिए। इसका मतलब यह है कि अब आप जो है जब आप loan देंगे तो आप real saving पर देंगे। यानी मैं अगर save करूंगा और मेरा पैसा निकलेगा तो किसी के पास जाएगा, exponentially बढ़ेगा नहीं। तो पहली बात तो यह कि आप private लोगों से money creation की power वापस लें और उसका बड़ा आसान तरीका full reserve banking है, जिसको Friedman कहता है कि इसको आप दिनों में नाफ़िज़ कर सकते हैं। दुनिया के सबसे बड़ा monetary economist है। वो कहते हैं कि बगैर किसी adverse financial market में impact के, जो आपका money market है या आप कह देंगे capital market में कोई adverse impact नहीं होगा और आप इसको हफ्ते दो हफ्ते में आप इसको implement कर सकते हैं। तो पहली बात तो यह कि आप money creation की power वापस दें और money कौन create करे? Money State Bank create करे। अभी भी create कर रहा है वो। लेकिन वो hard money create कर रहा है। वो पाँच दस percent है। अगर electronic money भी वो create करे और वो कितनी create करे जितनी GDP growth हो रही है। देखिए money किस लिए है? Money medium of exchange के तौर पर। यानी उसका क्या मतलब? उसका मैं खरीदारी करूं, मैं जाकर अपने बच्चों के लिए fee, fee अगर fees pay करनी है, वो pay करूं। मुझे घर के जो है दूध दही लाना है, वो लेकर आऊं। आपस में exchange ताकि जो barter का system बहुत मुश्किल था, तो ये जो money जो create हो, वो उतनी create हो जितनी आपकी goods and services बढ़ रही हैं। अगर पाकिस्तान में long term growth चार percent है तो कोई logic नहीं है कि आप बीस percent money create करें और महंगाई create करें, आप चार percent create करें और उससे ज्यादा अच्छी बात यह है कि वो money कर्ज के बगैर create हो। यानी अगर आप देखें ना कि अगर पाँच हज़ार रुपए का note create होता है तो government को चार हज़ार नौ सौ पचानवे का state को फायदा होता है। लेकिन वो बहुत थोड़ी सी create होती है। अगर electronic money create हो तो हमने अपनी book में बताया कि तकरीबन दो हज़ार billion का ही amount होगा, जिसमें आप इतना बड़ा amount है कि पाकिस्तान की हर गरीब family को आप बीस हज़ार रुपए महीने के दे सकते हैं, जो दस बारह million families.
37:56
अभी आप छह सात हज़ार billion create कर रहे हैं। तो इसी से महंगाई हो रही है क्योंकि production आपकी चार percent से बढ़ रही है और आप money पंद्रह percent से create कर रहे हैं। तो तीन बातें अगर आप ये कर लें कि commercial बैंकों को money create करने से रोक दें। उसके बाद commercial banking चलेगी। लेकिन commercial banking में दो काम करते हैं वो। एक उनका money का transaction है कि मैंने उसमें पैसे रखवाए और मैं payment करूँगा। ये money की transaction है और एक उनका कर्ज या investment की transaction है। ये दोनों आपस में जुड़ गए हैं। जैसे ही आप इसको अलग करेंगे तो एक उनका JazzCash या EasyPaisa की तरह एक money account होगा। उसमें आपने हमारे proposal में है कि आप एक percent तक fees लगा सकते हैं और banking का जो उसमें अगर आप चालीस trillion, छियालीस trillion की बात कर रहे हैं तो तकरीबन चार सौ साठ billion उनका इसमें income आ जाएगी। फिर वो जब payment करते हैं तो आपको पता है कि वो जिनको payment कर रहे हो तो उनसे भी commission ले रहे होते हैं। लेकिन जो ज्यादा बड़ा काम है, ये बहुत technical काम नहीं है। आपको पता है कि mobile phone भी payment payment शुरू कर दी है ना। कोई बहुत technical काम नहीं है। और बैंकों की branches तो ultimately लोग सभी कह रहे हैं कि कम हो जाएंगी। जो बैंकों का जो दूसरा काम है, investment वाला काम, उसमें असल पैसा है और वो अभी पैसा जो है ना वो actual investment नहीं कर रहे। वो हर सारा कर्ज दे रहे हैं क्योंकि उनके पास short term money मौजूद है। अगर वो investment banking में, में होगा जो उसके लिए real saving पर वो investment करेंगे तो banking अच्छी तरह चलेगी और जो महंगाई खत्म हो जाएगी क्योंकि महंगाई आप उतनी create करेंगे। सबसे बड़ी बात यह है कि मैं आपको बताऊं कि इससे है ना बड़ी seamless तरीके से पाकिस्तान का जो पचपन साठ trillion का कर्जा है, कितना बड़ा कर्जा आप सोच कर हैरान रह जाते हैं कि हर बच्चे के ऊपर शायद कहते होंगे एक million का कर्जा है। इसको आप seamless तरीके से खत्म कर देंगे। वो किस तरह खत्म करेंगे? ये लोगों को समझ में नहीं आ रही होती। अच्छे अच्छे chartered accountants, मेरी कई economists से भी बात हुई तो लोग समझने में जरा परेशान होते हैं कि आगे से तो खत्म कर देंगे, पीछे का कैसे खत्म हो जाएगा? तो ये आपको मैं बताऊं कि बड़ा आसान तरीका है कि अगर आज आप bank से जाकर कहें कि बल्कि मैं एक आम आदमी के मिसाल दूं। उससे कहा जाए कि तुम्हारे पास पाँच लाख रुपए हैं और तुम उसके account में पाँच लाख रुपए हैं और उससे कहा जाए कि तुम्हें अमेरिका का visa मिल जाएगा। पाकिस्तानी तो अमेरिका का visa बहुत चाह रहे होते हैं। एक करोड़ रुपए अपने bank में दिखाना है तुम्हें। तो वो क्या करेगा? वो ये करेगा कि पाँच लाख रुपए से एक करोड़ रुपए लेने के लिए कहीं अपने दोस्तों से, अपने मतलब लोगों से पैसे मांगेगा या अपने कोई asset बेचेगा, हैं? Cash convert करेगा और bank में डालेगा ताकि मुझे अमेरिका का visa मिल जाए। अब bank को आप ये कहें कि भाई तुम्हारे पास रखे हुए हैं State Bank में, तुमने पाँच percent cash रखा है। Cash की जरूरत तो बहुत थोड़ी है, लेकिन तुमने जो State Bank में पाँच, पाँच percent रखा है इसको आपको पचानवे percent लेकर जाना है। ये full reserve का मतलब यह है। तो bank क्या करेंगे? Bank ये करेंगे कि उनके पास तो न cash है और जाहिर है वो building तो अपनी बेचेंगे नहीं। उनके पास सारे क्या पड़े हुए हैं? Government bonds, treasury bills, sukoor, ये सत्तर अस्सी percent पड़े हैं। Seamless तरीके से ये transfer हो जाएंगे State Bank के पास। और State Bank जो है वो government की जेब है। उसके बाद हमारा proposal यह है कि इसको आप cancel out कर दें। तो उससे क्या होगा कि आपका अभी का कर्जा खत्म हो जाएगा। कर्जा खत्म होने का मतलब यह है कि, के budget का खसारा खत्म हो जाएगा। खसा, और खसारा खत्म होने का मतलब क्या है? कि आ-- खसारा क्योंकि interest की वजह से हो रहा है। ये तो आपको पता ही है कि interest की वजह से हो रहा है। खसारा खत्म होने का मतलब यह है कि government को loan नहीं लेने पड़ेंगे। और loan ना लेने का मतलब यह है कि महंगाई खत्म हो जाएगी। तो चारों चीजें ये linked हैं आपस में। तो मैं यह बताना ही चाह रहा था कि देखिए money को अगर आप public good दे के हैं, कहते हैं, तो इसको रियासत के हवाले होना चाहिए बिल्कुल और रियासत को बिल्कुल फॉर्मूले के हिसाब से करना चाहिए। नहीं कि आपके पास यह right हो कि आप कोई government आई, उसको समझ में आ रहा है जी कि भाई हमें जरूरत है हम बीस percent money create कर दें। अगर वो बीस percent money create करेंगे तो क्या होगा? वो यही होगा जो आज हो रहा है, महंगाई हो रही होगी। लेकिन कम से कम एक फायदा होगा क्योंकि वो money कर्ज के साथ नहीं create हो रही होगी तो अगली generation पर कर्ज नहीं जा रहा होगा। यानी ये अगर कोई government आती है, वो कहती है responsible नहीं है। वो कहती है कि नहीं भाई हमारा तो काम नहीं चलता, हमें dam बनाने हैं, हमें ये करने हैं, हम दो, हमें तो जी चार percent तो आप बहुत कम बता रहे हैं, हम बीस percent करेंगे। तो सोलह percent से महंगाई होगी। ये तो बड़ा simple है कि आपकी production नहीं बढ़ रही। लेकिन उसका भी एक फायदा यह है कि कम से कम आप जिसका आपके पास कोई right नहीं है, अगली generation पर आप कैसे कर्जा चढ़ा सकते हैं? आप बोलते हैं बताइए ना? एक बाप कैसे कह सकता है कि मैं अपने काम के लिए अगली generation पर डालते जाऊं कर्ज? तो मैं कहना यह चाह रहा था कि अगर आप seamless तरीके से पाकिस्तान को इस मुसीबत से निकालना चाहते हैं तो आप बाहर निकालें और उसका बड़ा solution, बड़ा clear है। ये solution है। फिर आप Bitcoin के उस, उस पे आप अगर आप ये कहते हैं कि नहीं भाई इसकी कोई investment वाली चीज तो हो सकती है। gold भी investment वाली चीज हो सकती है। currency के तौर पर use नहीं हो सकता। ये मतलब ये बड़ा clear है। currency के लिए की जो ताकत आती है ना वो आती है इससे कि उससे आपको tax की payment कर दें। अगर आज पाकिस्तान में ये allow कर दे ना कि Bitcoin से आप tax की payment भी कर सके और तो आपकी, आपकी economy इतनी छोटी है कि ये हिला देंगे आपको बिल्कुल। तो अब legal tenders एक बड़ा रियासत का काम होता है कि भाई जैसे आप कहें कि बड़े हैरानी हो कोई कहे कि फौज को आप outsource कर दें। तो currency creation जो है ना वो, वो basically रियासत का काम है और रियासत को उन्होंने छोड़ दिया है पिछले सौ सालों से। उसने commercial बैंकों के हवाले कर दिया है। अब अगर आप कहेंगे कि computer के हवाले कर दें तो फिर आपके कर्जे वहीं होंगे, bank वैसी money create कर रहे होंगे, तबाही वैसी ही रहेगी और फायदा नहीं होगा। तो उसके लिए आपको fundamental change करने की जरूरत है। फिर आप यह कहें कि सोने में किसी को रखना है, वह as a investment रखे। Bitcoin में किसी को समझ में आ रहा है कि भाई अगर आप कहते हैं कोई आलिम कहता है नहीं भाई यह तो Bitcoin में जो है वह माल की definition में आता है या Mufti Taqi Usmani से कोई different तो as a investment तो रख रहे हैं लोग आज भी ना। और कुछ लोगों ने शायद छोड़ भी दिया होगा। लेकिन बहरहाल वह transaction के तौर पर कोई इम्कान इस बात का नहीं है कि transaction और transaction जो हो भी रही है ना मैं आपको बताऊं उसमें ज्यादातर अभी पिछले दिनों एक साहब का एक बड़ी company का data उड़ा लिया था उन्होंने। उसके बाद उन्होंने कहा कि Bitcoin के जरिए payment करें। तो यह जो उसमें जो frauds हैं क्योंकि कोई consumer protection तो है नहीं। तो हजारों किस्म के जो currency आईं तबाह हो गईं। फिर जो Bitcoin में जो frauds के system है उसमें कोई protection नहीं है। तो वह transaction के तौर पर कभी भी वह mainstream नहीं बनेगा। Unless ये कहें कि सारा government खत्म हो जाए, सारे रियासतें खत्म हो जाएं, अपनी रियासत छोड़ दें जिसका अभी कोई इम्कान नजर नहीं आ रहा। तो मुझे लगता है कि हमें ना सही समझना चाहिए कि हम क्या चाहते हैं। हम पाकिस्तान को इस मुसीबत से निकालना चाहते हैं तो उस मुसीबत का हल यही है कि आप रियासत अपने पास ताकत ले currency की और उसको बिल्कुल हिसाब से create करें। तो आप यह महंगाई खत्म कर देंगे, कर्जे खत्म कर देंगे। उसके बाद फिर जाहिर है दूसरा बहुत बड़ा मसला हमारा tax का भी है। उसको भी हल करने की जरूरत है। यह tax में यह नहीं चल सकता कि आप गरीबों से 18% sales tax ले लें और आप उनकी खूबत खरीद खत्म कर दें। हमारा तो मैं बताऊं मुख्तसर словам में हम क्या करते हैं? 18% हम sales tax में लेते हैं उनसे 15% महंगाई में ले लेते हैं। तो आप गरीब की तनख्वाह में से 40% तो आपने निकाल लिया। फिर आप कहते हैं 10 करोड़ लोगों का बुरा हाल क्यों है? तो वह आपके यही तो system है। कोई यह नहीं कह रहा generally लोग खिलाफ बात शुरू कर देते हैं market economy के capitalism के। मेरा ख्याल है market economy से innovation भी होती है, फायदे भी हैं। Islam उसको support करता है। Dean उसको support करता है। यह जो दो मसले हैं ना money creation के और tax का system.
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यह basically तबाही फैला रहे हैं और उसका Islam में एक जगह तो हल Zakat का nizam है और एक यह कि riba का सही मायने में खात्मा। यह जो आज Islamic banking कर रहे हैं, वह जाहिर है कि उनमें भी वही मसले हैं कि fractional reserve से money create करते हैं। फिर वह उनकी policy rate के साथ उनको link रखना पड़ता है। मैंने बहुत लंबी बात। Sorry.

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