Ramdev
Indian guru and businessman
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Aug 30, 2026
EP-445 I Baba Ramdev Unfiltered: Hindu Rashtra, Kangana Ranaut, Gen Z, Modi, Yoga & Deep State
5:52
30:05

Baba RamdevGUEST
Behind this physical body every where soul is everywhere equal and the supersoul is everywhere equal। आदमी में भेद कहाँ है? पंचमहाभूतों का संघात है शरीर, इसके पीछे इंद्रियां, मन, चित्त, चेतना, आत्मा और सबका परमात्मा उसको चाहे Almighty God कहो, वाहेगुरु, अकाल पुरख कहो, खुदा कहो, अल्लाह कहो, भगवान कहो, परात्पर ब्रह्म कहो। भेद कहाँ है? भेद तो आदमी के प्रारब्ध और पुरुषार्थ का है। जो भी जन्म धर्मांतरों का संचित कर्माशय इस जन्म में भी जो उसके अलग-अलग प्रकार का जो उसका thought process है, emotions है, action है। भेद तो आदमी का प्रारब्ध और पुरुषार्थ के आधार पर है। बाकी तो अभेद ही दृष्टि है। तो यदि ये दृष्टि सब में पैदा हो जाए अभेद दृष्टि, एकत्वमनुपश्यत सर्व यत्र भवत्, यत्र विश्वं भवत्येकनिडम्। एको वशी सर्वभूतंतरात्मा। एकत्व की प्रतिष्ठा हो जाए फिर तो सारे लड़ाई झगड़े एकत्व हो जाए। तो एकत्व में क्या होना चाहिए फिर? एकत्व में ये होना चाहिए कि हम सबका देश एक है। हम सब मनुष्य हैं तो मानव धर्म हमारा एक है। तो ध-धर्म, मानव धर्म जो है वो हिंदू धर्म होना चाहिए? मानव धर्म का मतलब मानवीय कर्तव्य। धर्म हमारे कर्तव्य अर्थ में प्रयोग होता है और जो मजहब शब्द का प्रयोग होता है या religion शब्द का प्रयोग होता है अलग-अलग प्रकार के natures, अलग-अलग प्रकार के- जो हिंदू राष्ट्र में म-मजहब है, धर्म है, क्या है फिर? हिंदू एक अ-अ यदि उसको एक जीवन पद्धति है। यदि उसको आप व्यापक अर्थ में कहें तो वो अपने कर्तव्यों का प्रामाणिकता से निर्वहन है। धारण किया जाए जीवन में वो धर्म, जैसे अग्नि का धर्म अ-उष्णता है, जल का धर्म शीतलता है, पवन का धर्म गतिशीलता है, धरती का धर्म धैर्य है, आकाश का धर्म विराटता है। तो धर्म तो एक उसका एक स्वाभाविक नैसर्गिक गुण है जो क-सरातर है, शाश्वत है, सार्वभौमिक है, वैज्ञानिक है, अपरवर्ती नहीं है तत्व वो धर्म है। अगर मेरा नाम से फातिमा है और मेरे पूर्वज दो या तीन पुश्तों से- दो, तीन, पांच, दस पुश्तों से इस्लाम को। उन्होंने इस्लाम को कबूल किया है तो अगर वो आपके पास आती है तो आप उनको हिंदू मानेंगे? कि मुझे कोई किसी इस्लाम से या किसी के ईसाइयत से, जैनिज्म, बुद्धिज्म, सिखिज्म से, हिंदूज्म से कोई आपत्ति नहीं। हिंदू शब्द भी तो बहुत अरवाचीन है। तो हिंदू राष्ट्र से मैंने कहा हम सबके आ-पूर्वज आर्य हिंदू वैदिक सनातनी थे। शब्द प्रयोग में इसलिए कई बार शब्दों में बड़ा झमेला है। तो सब मूल तत्व एक ही है ना। तो ये सारी सृष्टि एकत्व के आधार पर चलती है। जब आप जैसे thought leaders जो हैं जब कहते हैं कि हिंदू राष्ट्र होगा, चाहे RSS के कोई leaders हों या आप हो, जब आप हिंदू राष्ट्र कहते हैं तो- देखिए जो अलग-अलग लोग जो बोल रहे हैं ना, अलग-अलग जो संगठन है या अलग-अलग जो व्यक्ति है ना, वो हिंदू धर्म को या हिंदू राष्ट्र को अ-बहुत ही क्षुद्र और संकीर्ण अर्थों में, वो मजहबी तौर पर, उन्मादी तौर पर उनको जब संबोधित करते हैं वो गलत है। यदि आप एक देश, एक संविधान, देश का मतलब क्या है? देश का एक संविधान है। तो देश लोकतांत्रिक, संवैधानिक, मानवीय, नैतिक, आध्यात्मिक मूल्यों से चल रहा है। उन नैतिक, संवैधानिक, मानवीय, आ-नैतिक, आध्यात्मिक मूल्यों का निर्जो निर्वहन है, वही एकत्व को में बांधता है हमको और उसको कहते हैं राष्ट्रीय एकता। एकता, अखंडता, संपूर्णता। तो एकता का जो भाव है ना, ये जो बंटवारे हो रखे हैं ना जाति, पंथ, वर्ग, समुदायों के नाम पर, ये बड़े खतरनाक हैं। ये भी तो हिंदुओं ने ही किया है ना? हिंदुओं ने नहीं किया। जाति के आधार पर जो- ये गलत है। ये, ये जो जातीय बंटवारे हैं, जाति, वर्ग, समुदायों के नाम पर, पंथों के नाम पर। कहां बाहर से लोगों ने आकर जाति बनाई है ना? इसीलिए मैं कह रहा हूं। जाति की जो प्रणाली है हिंदुओं ने ही की। जाति की प्रणाली हिंदू में जाति शब्द नाम का कोई तत्व ही नहीं। वेद में, दर्शनों में, मैं तो चारों वेद, वेद, दर्शन, उपनिषद, रामायण, महाभारत, भगवत गीता, पुराण पढ़ करके बैठा हुआ हूं। कहीं पर भी जाति शब्द है ही नहीं। ये सब जो कहीं पर विशेष अर्थों में प्रयोग भी किए जाते थे ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र, ये भी कोई जाति सूचक शब्द नहीं है। ब्रह्म, ब्रह्म का अर्थ नहीं, वो भी ब्रह्म का अर्थ है ज्ञान। क्ष अ-और जो ब्रह्म से, ज्ञान से जो आप्लावित है या ब्रह्म का अर्थ है अनंत, विराट। जो विराटता की संकीर्णताओं जिसकी भीतर से खत्म हो गई वो ब्रह्म है, ब्राह्मण है। और क्षत्रिय क्या है? क्षत माने भय, त्रय माने रक्षा, तो भय से रक्षा करो, क्षत्रिय। वैश्य क्या है? जो चारों तरफ समाज में घूम करके अभाव की को दूर करे, अज्ञान को दूर करे वो ब्राह्मण, अन्याय को दूर करे वो क्षत्रिय, अभाव को दूर करे वो वैश्य और अशुचिता, अपवित्रता को दूर करे वो शूद्र। ये तो शाब्दिक अर्थ है इनका। तो ये, ये ना जाति है, ना ये वर्ग है। ये तो एक समय में जैसे आजकल विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका ऐसे बोल दिया कि भाई ये, ये चार बड़े और, और लोग- व्यवसाय के हिसाब से फिर। तो एक, एक, एक तरह से एक ऐसा एक आज आदमी तो जैसे ये भाई ये जर्नलिस्ट लोग हैं, ये बुरी कृषि के लोग हैं, मीडिया के लोग हैं, ऐसा है ना? तो ये, ये जाति नहीं थी। दरअसल जातियों के नाम पर एक व्यवस्था अ-इस्लामिक समय में और जो है अंग्रेजों के समय में समाज को बांटा, फूट डालो, राज करो, यही है। इसलिए ये, ये जो विभाजन है ना, एक परिवार में स्मिता जी चार बच्चे हैं। एक पढ़ने-पढ़ाने का काम कर रहा है। एक जो है उसके अंदर ही कहीं कलर की नौकरी आई, उसमें स-या सफाई क-कर्मचारी की कहीं नौकरी आई। अब आदमी आजीविका के लिए अपनाता ही है। एक फौज में भर्ती हो गया, एक politics, एक ने politics join कर ली। एक मान लीजिए मेरी तरह से कोई साधु बन गया, तो कहां इसमें भेद रहेगा? आजीविका भेद को कभी भी हम भेद दृष्टि से नहीं देखते। एक परिवार में 10 आदमी है, 10 लोगों का काम है। लेकिन ये आजीविका का भेद भी ठीक नहीं है। जातीय भेद भी ठीक नहीं है। ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र के नाम पर भी भेद ठीक नहीं है। मैं तो कहता हूं गरीब अमीर के नाम पर भी। गरीब अमीरों को, अमीर गरीबों को गाली देने में लगे हैं। ये भी गलत है। जैसे किसी को SC, ST कहकर के अलग-अलग जाति सूचक शब्द कहकर के अपमानित करना या किसी को ब्राह्मणवाद से आजादी, क्षत्रियवाद से आजादी, सामंतवाद से आजादी, ये शब्द क्या है? ये आपस में एक दूसरे को लड़ाना, भिड़ाना और इससे अपने सामाजिक, अपने मजहबी और अपने सिया-सियासी सब जो मकसद है उनकी पूर्ति करना, ये कुछ ताकतवर लोगों का एक वर्चस्ववाद का एक अलग प्रकार का narrative है। अगर जाति वगैरह अ-अगर ये divisions नहीं है तो हम धर्मांतरण हिंदू धर्म में क्यों नहीं allow करते? और अगर करते हैं तो फिर अगर वो किस जाति में जाते हैं? आर्य समाज में allowed है लेकिन और तो कोई करते नहीं है। क्यों? अगर हिंदू धर्म से बाकी धर्म में धर्मांतरण हो रहा है तो हिंदू धर्म के अंदर- मैं तो ये धर्मांतरण शब्द को ही उचित नहीं मानता। आदमी को अपना जीवन बदलना चाहिए, अपना आचरण बदलना चाहिए, अपने ज्ञान को उन्नत बनाना चाहिए, अपनी संवेदनाओं को बड़ा बनाना चाहिए। ये जो आदमी कहीं नमाज पढ़ रहा है, कहीं किसी देवी देवता का सूत्र पढ़ रहा है या कहीं मस्जिद में जा रहा है, गिरजाघर में, गुरुद्वारे में जा रहा है, ये, ये सच में धर्म नहीं है। ये धर्म के प्रतीक हैं। जी। न ही लिंगम धर्मस्य कारणम। हमारे सा-सनातन के शास्त्रों का प्रमाण आपको दे दिया। लिंग जो है, चिन्ह जो है वो धर्म का कारण नहीं है। जो धारण किया जाए वो धर्म है और धर्म की हमारे यहाँ परिभाषा क्या दी गई? धृतिः क्षमा दमस्त्यं शौचमिन्द्रियनिग्रहः। धीरः विद्या सततं अक्रोधः दश कम धर्म लक्षणम्।। श्रियतां धर्मः सर्वस्वं श्रुत्वा च धारयताम्। आत्मनः प्रतिकूलानि परिषम न समाचरेत्।। जो आप अपने लिए अच्छा नहीं मानते हो दूसरों के लिए मत करो। धर्म का अर्थ है धैर्य, धृति, क्षमा, दूसरों को माफ करना। अपने शरीर, इंद्रियों, मन पर नियंत्रण करना। अअअ धर्म को अपने आचरण से ही सीधा जोड़ा है।
17 MINS LATER

Baba RamdevGUEST
New terminology से देश नया नहीं बन जाता। उसे कोई career नहीं बन जाता, कोई future नहीं बन जाता, कोई नई innovation invention नहीं हो जाता। तो यह GenZ के नाम पर कुछ लोग अलग तरह के dress पहन लेते हैं। अलग तरह से अपने बालों, बाल जैसे चाहो वैसे रखो ना। पूरे गंजे रहो। 10 तरह की cutting कराओ, 10 तरह के कपड़े पहनो। छोटे कपड़े पहनो, पूरे कपड़े पहनो, आधे कपड़े पहनो। वो आपकी आजादी है, उसमें कोई। और मैं तो वैसे उसका पक्षधर नहीं हूं कि लड़की लड़की के साथ ब्याह करके आ रही है। लड़का लड़के के साथ ब्याह करके आ रहा है या living relationship में रहने मेरी मर्जी। मेरा लिंग और मेरी मर्जी, मेरी शादी जो भी बर्बादी जो भी करना है करो। लेकिन वो मैं उसका पक्षधर नहीं हूं। फिर भी मैं कहता हूं आजादी का मतलब Gen Z का मतलब कुछ चोचलेबाजी नहीं होना चाहिए। इन चोचलेबाजीयों से कुछ नारे लगाने से, कुछ खास तरह के video बनाने से, अलग तरह के जो है मुंह ऐसे होठ आगे करके photo खींचने से Gen Z आपको differentiation आपका खाली कुछ activities के आधार पर कुछ आपके body shape के आधार पर, कपड़ों के आधार पर, language के आधार पर पूरी दुनिया जो है में जो भी कुछ हुआ है, जो पिछले 50 100 सालों में परिवर्तन हुआ है तो Chinese लोगों ने परिवर्तन किया। किसके आधार पर किया? Research के आधार पर, अपनी मेहनत के आधार पर किया। एक strategy के आधार पर किया। एक दिशा में पूरा देश लगा रहा। भारत से आज कम से कम मैं बोल रहा हूं तीन चार गुना आगे है। तीन चार गुना आगे चीन अलग-अलग क्षेत्र में। तो वहां के Gen Z ने तो कोई फूहड़पना नहीं किया। आज Japan भारत से आगे है कई मामलों में। आज Europe के छोटे-छोटे देश भारत से कई मामलों में आगे हैं। Korea जैसा छोटा सा देश दो देश लड़ रहे थे South Korea, North Korea और वो लोग आगे बढ़ गए। वहां के Gen Z ने तो किसी तरह की कोई बकवास नहीं की। बकवास करना अलग है, छपास होना अलग है, कहीं photo छप जाना अलग है। अलग-अलग ये Gen Z को लोग समझ नहीं रहे हैं और उसमें मैं देखता हूं कुछ social media के जो है कुछ ठलवे, कुछ भड़वे कुछ सुबह से शाम तक बकवास ही करते रहते हैं। कुछ सुबह से शाम तक social media पर video बनाते हैं। तू किया क्या तूने ये बता? Health में, education में, research में, agriculture में, industry में, wealth creation में तूने किया क्या है? खाली बैठ करके गाली देना। तो कुछ लोग जो है मोदी जी को गाली देने में लगे हुए हैं। कुछ लोग जो है मोदी के विरोधियों को गाली देने में लगे हैं। ये दोनों ही गलत है। पक्ष को गाली देना, विपक्ष को गाली देना या कोई और कुछ नहीं तो कुछ लोग इस्लाम को गाली देने, कुछ हिंदू धर्म को गाली देने, कुछ तो राम, कृष्ण, हनुमान, शिव को हमारे देवी देवताओं को गाली देने में लगे पड़े हैं।
