Nov 5, 2026 · 12 min · 1 segments
Supreme Court vs Government on UGC - UGC Will be taken Back Soon | Sanjay Dixit
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नमस्ते। क्या UGC विवाद का पटाक्षेप हो गया है? आज UGC का matter जो था वो Supreme Court में आया था। तो वहां जो कुछ भी बात हुई उसके माध्यम से जानने का प्रयास करते हैं। आप सभी से अनुरोध है कि कृपया हमारे channel को subscribe कर लें और video को like भी अवश्य कर लें। तो आज UGC का matter फिर से board पर था। Chief Justice का court था और दोनों पक्ष वहां पर मौजूद थे। जिसमें से विष्णु शंकर जैन जी थे जो अ, एक party यानी जिसमें आपके राहुल दीवान और संजय दीक्षित और दो अन्य हैं और इसके अतिरिक्त विनीत जिंदल और एक और party है तो तीन parties थी इसमें। उसके अतिरिक्त और भी कई सारे interventions file हुए हैं। वो सारे के सारे आज सामने थे और सामने Chief Justice थे। तो Chief Justice ने एक प्रश्न पूछा कि भाई आप लोग इस पर निर्णय क्यों नहीं लेते? और उन्होंने बड़ी बात कही और उस बड़ी बात से यह स्पष्ट हो गया कि अब किसी भी तरह से जो UGC regulations थे वो उस तरह से लागू नहीं हो सकते जिस तरह से उनको किया गया था और उसका कारण मैं बता चुका हूं कि जो हमारे यहां का जो पूरा system है, जो पूरा system है वो left से बड़ा ही मैं कहूंगा। मैं यह नहीं कहूंगा कि भयाक्रान्त है लेकिन वो left के सामने जो है वो अपने आप को बड़ा हीन, अपने को बड़ा हीन समझता है। एक हीन भावना है उसमें और उस हीन भावना से ग्रसित लोगों को इंदिरा जयसिंग बहुत बड़ी लगती हैं। मुझको नहीं लगती हैं। आपको भी हो सकता है न लगती हों। लेकिन जो हमारे system में जो लोग अंदर बैठे हैं उनको बड़ी भाई इंदिरा जयसिंग ने कह दिया। अब जो पूरा का पूरा जो issue है वो मैं पहले आपको बता चुका हूं। तो पहले आज बात कर लेते हैं कि आज क्या हुई और फिर उसके पीछे की बात जो है वो करते हैं। तो आज बात यह हुई कि Chief Justice ने कहा कि भाई इसमें किसी का भी नुकसान नहीं होना चाहिए। तो जो उत्तर दिया जो Solicitor General ने उस उत्तर से यह स्पष्ट हो जाता है कि वो जो पुराना regulation था वो तो गया। वो गया, गया क्यों? क्योंकि यह कहा गया कि किसी भी छात्र का अहित नहीं होगा। Chief Justice of India ने इसको दोहराया और कहा कि भैया किसी भी छात्र का, किसी भी छात्र का अहित नहीं होना चाहिए। यह जो regulations हैं वो सारे छात्रों को स्वीकार होने चाहिए। सारे छात्रों को स्वीकार होने चाहिए। देखिए छात्रों को तो स्वीकार हो जाएंगे। लेकिन जो छात्रों के माध्यम से जो राजनीति करना चाहते हैं उनको ही स्वीकार नहीं होते हैं। इंदिरा जयसिंग का क्या लेना देना है? इंदिरा जयसिंग केवल एक वकील हैं। इंदिरा जयसिंग जो हैं वो पायल तड़वी जो कि एक Schedule Tribe है और रोहित वेमुला जो कि claim कर रहे हैं कि वो Schedule Caste हैं लेकिन वास्तव में नहीं है जो कि उस समय की तेलंगाना सरकार के जो वहां पर जो उनका जो investigation हुआ था, जो विवेचना हुई थी उसमें यह स्पष्ट हो गया था कि रोहित वेमुला जो है वो SC नहीं है, OBC है और फर्जी तरीके से SC बनने का प्रयास कर रहे थे। पकड़े गए और उस tension में, उस अवसाद में उन्होंने आत्महत्या की पकड़े जाने से। तो सच्चाई सामने आने से यदि कोई अवसाद में चला जाता है और आत्महत्या कर लेता है तो इसमें system का क्या दोष? नियमों का क्या दोष? Regulations का क्या दोष? और यहां पर भी यही हुआ था। अब तो चूंकि यह कह दिया गया है तो मैं आपको यह कह दूं कि अब यह पटाक्षेप की ओर है। लेकिन activists दोनों तरफ से हैं। वो activists चुप नहीं बैठने वाले। एक चीज मैं यहां पर यह भी कह दूं कि जब ये नियम आए थे तो इस समय जो लोग मुखर हैं और जो अपने आप को GC activists भी कहते हैं, उनसे मेरा कोई मतभेद वैसे नहीं है। क्योंकि जो बात उठा रहे हैं वो सही ही है। बात गलत नहीं उठा रहे। लेकिन साथ में यह भी कहना पड़ेगा कि वो जब politics में घुस के और इसको जो है वो एक political इसका एक फायदा उठाना चाहते हैं या politically किसी को नुकसान या किसी को फायदा पहुंचाना चाहते हैं वो नहीं चलेगा। वे आरंभ में नहीं आए थे। आरंभ में सबसे पहले मैं और हमारे जो दूसरे साथी हैं वो आए थे और उन्होंने बाकायदा जो system है उसके सहारे चलकर UGC पे UGC regulations जो notify कर दिए गए थे hearing से एक दिन पहले उस पर stay लिया था। Stay लेने में सरकार ने हमारी मदद की थी। अब आप लोग कहेंगे कि आप कैसे जानते हैं? हम ऐसे जानते हैं क्योंकि case हमारा था। हमें पता है कि अंदर क्या हुआ था। लेकिन हम इसको इसलिए भी खुल के नहीं कहते क्योंकि यदि आप यह कहेंगे तो पता चला कि जो सामने वाला पक्ष है वो इसका उपयोग करके और सरकार को घेरने का प्रयास करेगा। सरकार को backfoot पर ले जाने का प्रयास करेगा। तो इतना भी हमको जो है वो विवेकहीन नहीं होना है। हमने इसको जो है इसी तरह से लेकर चलते हैं। अब ऐसा क्यों हुआ? आगे क्या नहीं होगा? मैं सरकार को कहता हूं कि सरकार को भी जो है इस पर जो राजनीति है उसमें अ, थोड़ा सा राजनीति का भी जो है वो उसको सोच लेना चाहिए। आपको घबराहट हो रही है मुझे पता है। आपको घबराहट हो रही है क्योंकि UGC का जो issue है, UGC का issue वो उत्तर प्रदेश में ground level पर चर्चा का विषय है। इससे आप इनकार नहीं कर सकते। इसमें आप चाहे तो शुतुरमुर्ग बनना चाहे भी तो शुतुरमुर्ग आप नहीं बन पाएंगे। क्यों? क्योंकि उत्तर प्रदेश में ऐसी रेत नहीं है जिसमें शुतुरमुर्ग अपना सर छुपा सके। आपके पास सर छुपाने की जगह नहीं है। वहां यह मामला चर्चा का विषय है। तो आज जो चर्चा हुई है और उसमें फिर से Supreme Court, Supreme Court में यानी कि Chief Justice के court में Solicitor General ने कहा कि हम इस पर जो है वो committee बिठाने जा रहे हैं और वह committee जो है वह इस तरह से निर्णय करेगी कि किसी भी छात्र का अहित न हो। कोई भी छात्र असुरक्षित न हो। महसूस ना करें। अब असुरक्षित तो पहले भी कोई महसूस नहीं कर रहा था क्योंकि जो पुराने regulations थे उसमें सभी का हित जो था वह एक प्रकार से सुरक्षित था। और आपने इंदिरा गांधी के दबाव में आकर, इंदिरा गांधी से पूछकर, इंदिरा गांधी ने जैसा कहा वैसा का वैसा regulations बना दिया। अब इस तरह के आप काम करेंगे तो आपको यह तो पता होना चाहिए ना कि इंदिरा गांधी जो हैं, उनकी जो वो, उनका जो निर्माण हुआ है वह किस कपड़े से हुआ है? Which cloth she is cut from? तो इतना अगर आपको पता नहीं है तो फिर आप अपना नुकसान ही करेंगे जब उनकी पूरी की पूरी बात मान लेंगे। उनको तो आपको समस्या में ही लाने का उद्देश्य है। समस्या में आपको ले आए। अब यह जो पुराने regulations थे, जो 2012 या 13 के regulations थे, वो बिल्कुल fair थे। और उसमें जो है वो किसी को भी, उसमें SCST का protection था। तो SCST का protection तो भाई SCST Act में भी है। और SCST का protection होने के साथ-साथ यह भी था कि जिस किसी को आरोपित किया जाता था उसको, उसको फिर सुनने का भी पूरा मौका दिया जाता था। और एक प्रकार से जो यह बना दिए गए हैं, जो vigilante squad बना दिए गए हैं, जो ढूंढ-ढूंढ के, चारों तरफ घूम-घूम के और पता करेंगे कि कहां किसके ऊपर discrimination हो रहा है। वो तो इसीलिए बनाए गए थे जिससे कि पूरी तरह से, पूरी तरह से छात्रों में एक विभेद हो सके। यही वामपंथ का सदैव का उद्देश्य रहता है। उसको तो लोगों को तोड़ना ही तोड़ना है। उसको अलग-अलग खंड बनाने हैं जिससे कि उसकी जो लिप्सा है, उसकी जो power की लिप्सा है, उसकी जो शासन करने की जो लिप्सा है, उसकी पूर्ति हो सके। वो पूर्ति वो अपने जो leftist विचारधारा के अनुसार लोगों को खंड-खंड करके ही प्राप्त करता है। लोगों में समन्वय करना left का उद्देश्य कभी भी नहीं रहा है। जहां भी लोगों में समन्वय करने की बात आएगी तो आप पाएंगे कि वो समन्वय करने की बात जो है वो हमारी परंपरा से ही आती है। यानी भारतीय परंपरा में ही समन्वय की बात आती है। सर्वे भवन्तु सुखिना सर्वे सन्तु निरामया। यह भारतीय दर्शन है। यह leftist दर्शन नहीं है। leftist दर्शन में class enemy को समाप्त करने का दर्शन है। class enemy कौन है? वो रोज नए class enemy ढूंढते हैं। उनके यहां यही है class enemy है। Marx ने class enemies बनाए थे और वो class enemies में वो यहां की परिस्थिति में उन्होंने सवर्णों को class enemy मान रखा है। तो यदि उन्होंने उनको class enemy मान रखा है तो उन class enemy का उनको समापन करना है। उनको पूरी तरह से उखाड़ फेंकना ही नहीं है बल्कि उनका तो उनके हिसाब से तो उनके बस चले तो उनका कत्लेआम कर देना है। यह leftist विचारधारा है। आज तक कोई orientation नहीं किया सरकार ने जिससे कि इस leftist विचारधारा को cure किया जा सके। अब राजनीतिक रूप से भी आपको इसको counter करने के लिए बहुत सारे आपके पास मसले पड़े हुए हैं। जिसमें आप एक तो मैं low hanging fruits कहता हूँ। low hanging fruits को आप pluck कीजिए। low hanging fruits हैं यानी कि Places of Worship Act है जिसको आपने सदैव ही जिसका विरोध किया था। जब यह लाया गया था parliament में तब भी आपने इसका विरोध किया था BJP वालों। तो आज जब Places of Worship Act की बात आ रही है तो आप इसको समाप्त क्यों नहीं कर देते? इसमें मुल्ले मौलवियों के और इन leftist के अलावा कौन है जो इसका विरोध करेगा? कोई नहीं करेगा। और आपका जो base है वो पूरी तरह से इसका स्वागत करेगा। वो भी नहीं कर रहे। वो भी नहीं कर रहे। minority की definition की बात है। minorities को empower करके आपको क्या मिल रहा है? minorities जितना भी आप empower करते हैं वह आप अधिकतर Muslim और Christian minority को empower करते हैं जिनको minority माना ही नहीं जाना चाहिए। क्योंकि यह global majorities हैं। और यह global majorities जो हैं वो अपनी global majorities का जो प्रभाव है वो बाहर बैठकर आपके ऊपर यानी भारत सरकार के ऊपर वो पूरा प्रभाव डालती है। उसके बाद भी आपने पहले तो इनको minority दे रखा है और फिर जब जहां बात होती है कि जहां यह लोग majority में हैं, वहां हिंदू minority में हैं, हिंदुओं को minority का status मिलना चाहिए, उस मुकदमे को भी आप पूरा नहीं होने देते। उसमें आप अपना affidavit file नहीं करते। तो मेरा आपसे यही अनुरोध है कि यह UGC वाला मामला फटाफट, यह committee जो है ना, इसका यह मत इंतजार कीजिए कि यह मामला खिंचता रहे। उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले इस पर निर्णय ले लीजिए। इसको आप आपकी committee का निर्णय दाखिल कर दीजिए court में। इस चक्कर में मत रहिए कि आपको कोई vote का नुकसान हो जाएगा। आपको किसी प्रकार के vote का नुकसान नहीं होने वाला। वो अंबेडकरवादी, वो आपको वैसे भी कभी vote नहीं देने वाले। ये leftist वो वैसे भी आपको कभी vote नहीं देने वाले। और इसके समर्थन में leftist और अंबेडकरवादी के अतिरिक्त और कोई नहीं है इस समय। इसकी मांग भी नहीं की थी वो OBC वर्ग ने कभी भी। लेकिन आपने कर दिया तो कर दिया। अब उससे बाहर निकलना है आपको। तो बाहर निकलने का रास्ता तो court ने आपको दे दिया है जब कह दिया है कि भाई किसी के प्रति भी अन्याय नहीं होना चाहिए तो उसी में किसी के प्रति अन्याय नहीं होने वाला। जो पुराना regulation है उसको लागू करके इसको withdraw कर लीजिए। simple सी चीज है। करिए। ज्यादा हर समय जो है वो बहुत ज्यादा गुणा भाग करना उचित नहीं होता। कभी-कभी जो सत्य है उसका भी अनुसरण और उसका पालन कर लेना चाहिए। जय हिंद। जय भारत। वंदे मातरम।

नमस्ते। क्या UGC विवाद का पटाक्षेप हो गया है? आज UGC का matter जो था वो Supreme Court में आया था। तो वहां जो कुछ भी बात हुई उसके माध्यम से जानने का प्रयास करते हैं। आप सभी से अनुरोध है कि कृपया हमारे channel को subscribe कर लें और video को like भी अवश्य कर लें। तो आज UGC का matter फिर से board पर था। Chief Justice का court था और दोनों पक्ष वहां पर मौजूद थे। जिसमें से विष्णु शंकर जैन जी थे जो अ, एक party यानी जिसमें आपके राहुल दीवान और संजय दीक्षित और दो अन्य हैं और इसके अतिरिक्त विनीत जिंदल और एक और party है तो तीन parties थी इसमें। उसके अतिरिक्त और भी कई सारे interventions file हुए हैं। वो सारे के सारे आज सामने थे और सामने Chief Justice थे। तो Chief Justice ने एक प्रश्न पूछा कि भाई आप लोग इस पर निर्णय क्यों नहीं लेते? और उन्होंने बड़ी बात कही और उस बड़ी बात से यह स्पष्ट हो गया कि अब किसी भी तरह से जो UGC regulations थे वो उस तरह से लागू नहीं हो सकते जिस तरह से उनको किया गया था और उसका कारण मैं बता चुका हूं कि जो हमारे यहां का जो पूरा system है, जो पूरा system है वो left से बड़ा ही मैं कहूंगा। मैं यह नहीं कहूंगा कि भयाक्रान्त है लेकिन वो left के सामने जो है वो अपने आप को बड़ा हीन, अपने को बड़ा हीन समझता है। एक हीन भावना है उसमें और उस हीन भावना से ग्रसित लोगों को इंदिरा जयसिंग बहुत बड़ी लगती हैं। मुझको नहीं लगती हैं। आपको भी हो सकता है न लगती हों। लेकिन जो हमारे system में जो लोग अंदर बैठे हैं उनको बड़ी भाई इंदिरा जयसिंग ने कह दिया। अब जो पूरा का पूरा जो issue है वो मैं पहले आपको बता चुका हूं। तो पहले आज बात कर लेते हैं कि आज क्या हुई और फिर उसके पीछे की बात जो है वो करते हैं। तो आज बात यह हुई कि Chief Justice ने कहा कि भाई इसमें किसी का भी नुकसान नहीं होना चाहिए। तो जो उत्तर दिया जो Solicitor General ने उस उत्तर से यह स्पष्ट हो जाता है कि वो जो पुराना regulation था वो तो गया। वो गया, गया क्यों? क्योंकि यह कहा गया कि किसी भी छात्र का अहित नहीं होगा। Chief Justice of India ने इसको दोहराया और कहा कि भैया किसी भी छात्र का, किसी भी छात्र का अहित नहीं होना चाहिए। यह जो regulations हैं वो सारे छात्रों को स्वीकार होने चाहिए। सारे छात्रों को स्वीकार होने चाहिए। देखिए छात्रों को तो स्वीकार हो जाएंगे। लेकिन जो छात्रों के माध्यम से जो राजनीति करना चाहते हैं उनको ही स्वीकार नहीं होते हैं। इंदिरा जयसिंग का क्या लेना देना है? इंदिरा जयसिंग केवल एक वकील हैं। इंदिरा जयसिंग जो हैं वो पायल तड़वी जो कि एक Schedule Tribe है और रोहित वेमुला जो कि claim कर रहे हैं कि वो Schedule Caste हैं लेकिन वास्तव में नहीं है जो कि उस समय की तेलंगाना सरकार के जो वहां पर जो उनका जो investigation हुआ था, जो विवेचना हुई थी उसमें यह स्पष्ट हो गया था कि रोहित वेमुला जो है वो SC नहीं है, OBC है और फर्जी तरीके से SC बनने का प्रयास कर रहे थे। पकड़े गए और उस tension में, उस अवसाद में उन्होंने आत्महत्या की पकड़े जाने से। तो सच्चाई सामने आने से यदि कोई अवसाद में चला जाता है और आत्महत्या कर लेता है तो इसमें system का क्या दोष? नियमों का क्या दोष? Regulations का क्या दोष? और यहां पर भी यही हुआ था। अब तो चूंकि यह कह दिया गया है तो मैं आपको यह कह दूं कि अब यह पटाक्षेप की ओर है। लेकिन activists दोनों तरफ से हैं। वो activists चुप नहीं बैठने वाले। एक चीज मैं यहां पर यह भी कह दूं कि जब ये नियम आए थे तो इस समय जो लोग मुखर हैं और जो अपने आप को GC activists भी कहते हैं, उनसे मेरा कोई मतभेद वैसे नहीं है। क्योंकि जो बात उठा रहे हैं वो सही ही है। बात गलत नहीं उठा रहे। लेकिन साथ में यह भी कहना पड़ेगा कि वो जब politics में घुस के और इसको जो है वो एक political इसका एक फायदा उठाना चाहते हैं या politically किसी को नुकसान या किसी को फायदा पहुंचाना चाहते हैं वो नहीं चलेगा। वे आरंभ में नहीं आए थे। आरंभ में सबसे पहले मैं और हमारे जो दूसरे साथी हैं वो आए थे और उन्होंने बाकायदा जो system है उसके सहारे चलकर UGC पे UGC regulations जो notify कर दिए गए थे hearing से एक दिन पहले उस पर stay लिया था। Stay लेने में सरकार ने हमारी मदद की थी। अब आप लोग कहेंगे कि आप कैसे जानते हैं? हम ऐसे जानते हैं क्योंकि case हमारा था। हमें पता है कि अंदर क्या हुआ था। लेकिन हम इसको इसलिए भी खुल के नहीं कहते क्योंकि यदि आप यह कहेंगे तो पता चला कि जो सामने वाला पक्ष है वो इसका उपयोग करके और सरकार को घेरने का प्रयास करेगा। सरकार को backfoot पर ले जाने का प्रयास करेगा। तो इतना भी हमको जो है वो विवेकहीन नहीं होना है। हमने इसको जो है इसी तरह से लेकर चलते हैं। अब ऐसा क्यों हुआ? आगे क्या नहीं होगा? मैं सरकार को कहता हूं कि सरकार को भी जो है इस पर जो राजनीति है उसमें अ, थोड़ा सा राजनीति का भी जो है वो उसको सोच लेना चाहिए। आपको घबराहट हो रही है मुझे पता है। आपको घबराहट हो रही है क्योंकि UGC का जो issue है, UGC का issue वो उत्तर प्रदेश में ground level पर चर्चा का विषय है। इससे आप इनकार नहीं कर सकते। इसमें आप चाहे तो शुतुरमुर्ग बनना चाहे भी तो शुतुरमुर्ग आप नहीं बन पाएंगे। क्यों? क्योंकि उत्तर प्रदेश में ऐसी रेत नहीं है जिसमें शुतुरमुर्ग अपना सर छुपा सके। आपके पास सर छुपाने की जगह नहीं है। वहां यह मामला चर्चा का विषय है। तो आज जो चर्चा हुई है और उसमें फिर से Supreme Court, Supreme Court में यानी कि Chief Justice के court में Solicitor General ने कहा कि हम इस पर जो है वो committee बिठाने जा रहे हैं और वह committee जो है वह इस तरह से निर्णय करेगी कि किसी भी छात्र का अहित न हो। कोई भी छात्र असुरक्षित न हो। महसूस ना करें। अब असुरक्षित तो पहले भी कोई महसूस नहीं कर रहा था क्योंकि जो पुराने regulations थे उसमें सभी का हित जो था वह एक प्रकार से सुरक्षित था। और आपने इंदिरा गांधी के दबाव में आकर, इंदिरा गांधी से पूछकर, इंदिरा गांधी ने जैसा कहा वैसा का वैसा regulations बना दिया। अब इस तरह के आप काम करेंगे तो आपको यह तो पता होना चाहिए ना कि इंदिरा गांधी जो हैं, उनकी जो वो, उनका जो निर्माण हुआ है वह किस कपड़े से हुआ है? Which cloth she is cut from? तो इतना अगर आपको पता नहीं है तो फिर आप अपना नुकसान ही करेंगे जब उनकी पूरी की पूरी बात मान लेंगे। उनको तो आपको समस्या में ही लाने का उद्देश्य है। समस्या में आपको ले आए। अब यह जो पुराने regulations थे, जो 2012 या 13 के regulations थे, वो बिल्कुल fair थे। और उसमें जो है वो किसी को भी, उसमें SCST का protection था। तो SCST का protection तो भाई SCST Act में भी है। और SCST का protection होने के साथ-साथ यह भी था कि जिस किसी को आरोपित किया जाता था उसको, उसको फिर सुनने का भी पूरा मौका दिया जाता था। और एक प्रकार से जो यह बना दिए गए हैं, जो vigilante squad बना दिए गए हैं, जो ढूंढ-ढूंढ के, चारों तरफ घूम-घूम के और पता करेंगे कि कहां किसके ऊपर discrimination हो रहा है। वो तो इसीलिए बनाए गए थे जिससे कि पूरी तरह से, पूरी तरह से छात्रों में एक विभेद हो सके। यही वामपंथ का सदैव का उद्देश्य रहता है। उसको तो लोगों को तोड़ना ही तोड़ना है। उसको अलग-अलग खंड बनाने हैं जिससे कि उसकी जो लिप्सा है, उसकी जो power की लिप्सा है, उसकी जो शासन करने की जो लिप्सा है, उसकी पूर्ति हो सके। वो पूर्ति वो अपने जो leftist विचारधारा के अनुसार लोगों को खंड-खंड करके ही प्राप्त करता है। लोगों में समन्वय करना left का उद्देश्य कभी भी नहीं रहा है। जहां भी लोगों में समन्वय करने की बात आएगी तो आप पाएंगे कि वो समन्वय करने की बात जो है वो हमारी परंपरा से ही आती है। यानी भारतीय परंपरा में ही समन्वय की बात आती है। सर्वे भवन्तु सुखिना सर्वे सन्तु निरामया। यह भारतीय दर्शन है। यह leftist दर्शन नहीं है। leftist दर्शन में class enemy को समाप्त करने का दर्शन है। class enemy कौन है? वो रोज नए class enemy ढूंढते हैं। उनके यहां यही है class enemy है। Marx ने class enemies बनाए थे और वो class enemies में वो यहां की परिस्थिति में उन्होंने सवर्णों को class enemy मान रखा है। तो यदि उन्होंने उनको class enemy मान रखा है तो उन class enemy का उनको समापन करना है। उनको पूरी तरह से उखाड़ फेंकना ही नहीं है बल्कि उनका तो उनके हिसाब से तो उनके बस चले तो उनका कत्लेआम कर देना है। यह leftist विचारधारा है। आज तक कोई orientation नहीं किया सरकार ने जिससे कि इस leftist विचारधारा को cure किया जा सके। अब राजनीतिक रूप से भी आपको इसको counter करने के लिए बहुत सारे आपके पास मसले पड़े हुए हैं। जिसमें आप एक तो मैं low hanging fruits कहता हूँ। low hanging fruits को आप pluck कीजिए। low hanging fruits हैं यानी कि Places of Worship Act है जिसको आपने सदैव ही जिसका विरोध किया था। जब यह लाया गया था parliament में तब भी आपने इसका विरोध किया था BJP वालों। तो आज जब Places of Worship Act की बात आ रही है तो आप इसको समाप्त क्यों नहीं कर देते? इसमें मुल्ले मौलवियों के और इन leftist के अलावा कौन है जो इसका विरोध करेगा? कोई नहीं करेगा। और आपका जो base है वो पूरी तरह से इसका स्वागत करेगा। वो भी नहीं कर रहे। वो भी नहीं कर रहे। minority की definition की बात है। minorities को empower करके आपको क्या मिल रहा है? minorities जितना भी आप empower करते हैं वह आप अधिकतर Muslim और Christian minority को empower करते हैं जिनको minority माना ही नहीं जाना चाहिए। क्योंकि यह global majorities हैं। और यह global majorities जो हैं वो अपनी global majorities का जो प्रभाव है वो बाहर बैठकर आपके ऊपर यानी भारत सरकार के ऊपर वो पूरा प्रभाव डालती है। उसके बाद भी आपने पहले तो इनको minority दे रखा है और फिर जब जहां बात होती है कि जहां यह लोग majority में हैं, वहां हिंदू minority में हैं, हिंदुओं को minority का status मिलना चाहिए, उस मुकदमे को भी आप पूरा नहीं होने देते। उसमें आप अपना affidavit file नहीं करते। तो मेरा आपसे यही अनुरोध है कि यह UGC वाला मामला फटाफट, यह committee जो है ना, इसका यह मत इंतजार कीजिए कि यह मामला खिंचता रहे। उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले इस पर निर्णय ले लीजिए। इसको आप आपकी committee का निर्णय दाखिल कर दीजिए court में। इस चक्कर में मत रहिए कि आपको कोई vote का नुकसान हो जाएगा। आपको किसी प्रकार के vote का नुकसान नहीं होने वाला। वो अंबेडकरवादी, वो आपको वैसे भी कभी vote नहीं देने वाले। ये leftist वो वैसे भी आपको कभी vote नहीं देने वाले। और इसके समर्थन में leftist और अंबेडकरवादी के अतिरिक्त और कोई नहीं है इस समय। इसकी मांग भी नहीं की थी वो OBC वर्ग ने कभी भी। लेकिन आपने कर दिया तो कर दिया। अब उससे बाहर निकलना है आपको। तो बाहर निकलने का रास्ता तो court ने आपको दे दिया है जब कह दिया है कि भाई किसी के प्रति भी अन्याय नहीं होना चाहिए तो उसी में किसी के प्रति अन्याय नहीं होने वाला। जो पुराना regulation है उसको लागू करके इसको withdraw कर लीजिए। simple सी चीज है। करिए। ज्यादा हर समय जो है वो बहुत ज्यादा गुणा भाग करना उचित नहीं होता। कभी-कभी जो सत्य है उसका भी अनुसरण और उसका पालन कर लेना चाहिए। जय हिंद। जय भारत। वंदे मातरम।
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