Oct 23, 2026 · 12 min · 1 segments
One More Flop Show by Protest Industry | Yogendra Yadav and Neha Bore Retract from Regime Change
Sanjay DixitHostNo entities detected.

राष्ट्रवादियों का महाकुंभ एक बार फिर से तैयार है और इसे पूरा करने के लिए हमें आपके सहयोग की आवश्यकता है। जयपुर dialogues Annual Summit में देशभर के राष्ट्रवादी धुरंधर एक मंच पर एकत्रित होते हैं और इसके लिए एक बड़ी आर्थिक राशि की आवश्यकता होती है। हमने एक सहयोग लक्ष्य तय किया है और इसे पूरा करवाने का दायित्व आपका है। Donate करें, support करें, इस राष्ट्रवादी मंच को और सुदृढ़ बनाएं। QR code screen पर दिया हुआ है और उसे scan करके आप अपना सहयोग दे सकते हैं। Support का link description में भी है। नमस्ते, आप सभी से अनुरोध है कृपया channel को subscribe करें video को like करें। आज हम बात करने जा रहे हैं protest industry के sudden collapse के बारे में। आपको पता है कितनी अच्छी protest industry चली थी। protest industry में लोगों ने जम-जम के पैसे कमाए। Reel वालों ने reel के पैसे कमाए और suppliers ने खाना खिलाने के लिए पैसे कमाए। biryani भी खिलाई गई और आपके burger भी खिलाए गए। सब कुछ हुआ। ये सब होते-होते होते-होते आज यह स्थिति है कि पूरी की पूरी जो protest industry है वो इधर-उधर भाग रही है। कारण बताऊं आपको क्या हुआ या यह बताऊं कि ऐसा मैं क्यों कह रहा हूँ। कुछ लोग यह कहेंगे कि भाई साहब आपका यह जो है यह अंदाजा या यह आपका जो conclusion है, निष्कर्ष है, यह premature है। लेकिन भाई मैं तो आज का देख रहा हूँ। यानी आज है 23 October। 23 October के दिन एक call हुई थी कि साहब आपको जो है वह सड़कों पर उतरना है। और इस call को देने वाले प्रमुख लोग थे प्रशांत भूषण उर्फ प्रदूषण या अशांत प्रदूषण भी कुछ लोग कहते हैं और पराकला प्रभाकर। यह पराकला प्रभाकर कौन है? आप सोचेंगे भाई यह पराकला प्रभाकर कौन है? तो पराकला प्रभाकर जो है, यह निर्मला सीताराम जी के पति हुआ करते थे। मैं इसलिए कह रहा हूँ हुआ करते थे क्योंकि वे लगभग मेरे ख्याल से 10-12 वर्ष से दोनों लोग जो है वह अलग-अलग हैं। यानी संभवतः निर्मला सीताराम जी के मंत्री बनने के पहले से पराकला प्रभाकर जी जो थे वह अलग हो गए थे। तो 23 October के मैंने आज की जो दिल्ली में बड़ा भारी प्रदर्शन होने वाला था और पूरे देश में जगह-जगह पर बड़ा प्रदर्शन होने वाला था, उसके लिए मैंने चारों तरफ बहुत प्रयास किया और ढूंढा कि कहीं कुछ मिल जाए, कहीं कुछ मिल जाए, पराकला प्रभाकर के नाम से कुछ मिल जाए, 23 October protest के नाम से कुछ मिल जाए, अशांत प्रदूषण उर्फ प्रशांत भूषण के नाम से कुछ मिल जाए। तो साहब एक छोटा सा video मिला। उसमें अशांत प्रदूषण जी जो है वह एक rally निकाले हैं। और वह rally जानते हैं कहाँ निकाले हैं। वह rally निकाल रहे हैं of all the places पालमपुर में। पालमपुर में rally निकालना है। और उसमें भी पालमपुर में जबकि उनका जो है वह बड़ा वहां पर एक संगठन है। वह संभावना Institute चलाते हैं। वह संभावना Institute में बहुत सारे जो हैं मेरे विचार से होंगे उसमें उनके employee भी होंगे और वहां पर जो enrolled जो trainees होंगे वो भी होंगे। इसके सबके बाद भी वहां मुश्किल से 50 लोग। मुश्किल से 50 लोग। अब बताइए आप इस प्रकार की rally यदि निकालेंगे अशांत प्रदूषण जी तो यह पूरी protest industry जो इतनी मुश्किल से फली-फूली है और बड़े-बड़े लोगों का इसको साथ मिला है। Neville Roy सिंघम वाला जो group है Deep State का, उसका पूरा साथ मिला हुआ है और उसने जो साथ में आपके विजय प्रसाद जैसे लोग या आपके सलील श्रीवास्तव शायद जैसे लोग जो Open Society के जो CEO थे, वो जो राजीव गांधी, राहुल गांधी के साथ में भारत जोड़ो यात्रा में साथ-साथ चल रहे थे। उन सबके होते हुए भी इस protest industry का यह हाल है। मुझे बताया गया है कि राहुल गांधी को बहुत कस के झाड़ लगी है। Soros ने बहुत झाड़ा है। मतलब Soros ने जिनको भी भेजा था अपना दूध बनाकर उसने बहुत झाड़ा और कहा कि तुम बिल्कुल जो है नाकारे हो, निकम्मे हो, नाकामयाब हो। कोई काम ढंग से नहीं कर सकते। पिछले 10 साल से हम तुमको support कर रहे हैं और एक बार भी तुम कुछ कर नहीं पाए। हर protest तुम्हारी fail है और भूल जाओ यहां तो उल्टा हो गया। हम तो चले थे यह कहने कि भाई किसी भी प्रकार से यह regime change हो जाए। यहां पर जो स्थिति बनी है उसमें नरेंद्र मोदी का समर्थन और बढ़ गया है। तो तुमने इस तरह की स्थिति बना दी कि तुमको पूरी समझ नहीं है और तुम इस तरह से काम करते हो। तुम्हारे पैसे cut! तो अब राहुल गांधी ने सुना है कि एक और आखिरी chance मांगा है कि नहीं, नहीं, नहीं, हमारे पैसे cut मत करो। दो-तीन billion dollar हमें 15 billion dollar और दे दो। उनका कोई 15 billion dollar नहीं। हम साले 15 million नहीं देंगे। क्या बात करते हो? अपने resources से कुछ करके बताओ नहीं तो फिर हमेशा के लिए हमारा-तुम्हारा रास्ता खत्म। और जो कुछ भी हम करेंगे वो हम Neville Roy सिंघम के जरिए करेंगे। जो Progressive International है उनकी, उस Progressive International के जरिए करेंगे। अब इसका impact क्या हुआ? यह तो पहली बात है। अब इसका impact यह हुआ था आपके माननीय श्री योगेंद्र यादव उर्फ सलीम उर्फ आंदोलनजीवी। वो आंदोलनजीवी जी कल चले गए अजीत अंजुम के YouTube पर और अजीत अंजुम के YouTube पर उन्होंने यह कह दिया कि भाई हमारा कोई regime change का इरादा नहीं था। मतलब यह regime change का जो शब्द है वो प्रशांत भूषण के मुंह से निकल गया। उसके बाद से यह पूरी की पूरी protest industry जो है ऐसा लगता है जैसे मानो coma में चली गई हो। अरे भाई, अगर आप regime change करना ही चाहते हो तो कह दो ना। तो यो या जो है। और सलीम वो कल यही कहते पाए गए। वो कहते पाए गए कि नहीं नहीं मैंने ऐसा जो है देखिए ये सब जो कुछ भी हम कर रहे हैं इसका अंतिम लक्ष्य तो यही है कि भाई आप जो है चुनाव में भाग लें और चुनाव में मतदान के जरिए regime change करें या चुनाव के जरिए सरकार को बदलें। इसका मतलब यही हो सकता है। इसका अन्य कोई मतलब हो ही नहीं सकता। वो भी पलट गए। ये वही है याद कीजिएगा। ये वही है कि भाई अब सारे फैसले संसद से नहीं सड़क से होंगे। और आज पलट कर क्या कह रहे हैं? तो क्या हुआ आखिरकार? क्या हुआ? software update कहाँ से हुआ? क्या केवल इतना कहने से हो जाएगा कि भाई जिस प्रकार से cockroach का software update किया गया, bond पर bond लगा लगा के और उनको legal trap में फंसा फंसा के और उनका जो है एक तरह से आवाज़ ही बंद हो गई। तो क्या सलीम यादव जैसे लोग जो है वो इस चीज से डर जाएंगे? ना! उनका software update जो है उनके जो आका लोग हैं, जो बाहर बैठे हुए हैं उनके माध्यम से हुआ है। और ना केवल उनके माध्यम से हुआ। देखिए deep state में भी rift है। मैं कई बार आपको बता चुका हूँ। तो वो जो deep state है उसने भी ये Neville Roy Singham वाली जो leftist, जो leftist part है deep state का American deep state का उसको expose कर दिया क्योंकि वो जो है वो China की तरफ ज्यादा झुक रही थी। तो आपस में ही पंगा हो गया। Rubio यहाँ आ गए। Trump ने अच्छी-अच्छी बातें कर दी। Trump midterm के चक्कर में जुग गए। इन सारे चीजों के कारण जो पूरा global scenario है वो बदल गया है। लेकिन राहुल गांधी मानने को तैयार नहीं है। अब देखो नेहा वोरा को ही देख लो आप। नेहा वोरा का उदाहरण ले लेते हैं। नेहा वोरा भी अपने बयान से मुकर गई हैं। उनका कहना है कि उनका जो बांग्लादेश वाला बयान था वो संदर्भ से काट कर चलाया गया है। उसका वो संदर्भ नहीं है जिसके बारे में लोग उसको प्रचारित कर रहे हैं कि यह बांग्लादेश के जो क्रांतिवीर हैं उनका, उनकी प्रेरणा लेकर भारत में भी किसी प्रकार की खूनी क्रांति करना चाहती हैं। वो कह रही हैं कि जो मेरा बयान है वो तो मैंने एक video जो था वो संदेश भेजा था और वो संदेश जो था वो बांग्लादेश के socialist, socialist students front को भेजा था। तो वो socialist student front के मजलिस में वो चलाया गया था और उसको जो है वो कतई संदर्भ से निकाल के और तोड़ मरोड़ करके पेश किया जा रहा है। मतलब ये भी regime change वाले मामले से एक तरह से भागती घूम रही हैं। कल गई थी आपको पता है High Court में। High Court में फैसला जो है वो सुरक्षित है। लेकिन आप एक बार High Court चले जाते हो उसके बाद फैसला सुरक्षित भी हो जाए तो उसके बाद भी आपको पता है कि क्या होता है। क्योंकि court यदि आपको कोई relief भी देगा तो वो relief unconditional नहीं होगी। उस relief के साथ में कुछ conditions होंगी और वो conditions विशेषकर यदि High Court वो conditions तय करता है और आप उन conditions का उल्लंघन करते हो तो आप फिर से फंस जाते हो। और जो भी कोई भी conditions High Court जो है वो तय करते हैं तो वो ये कहते हैं कि आप law के विरुद्ध कोई भी काम नहीं करेंगे। law के विरुद्ध कोई काम नहीं करेंगे इसका अर्थ यह हुआ कि आप बिना permission लिए कोई protest नहीं करेंगे। फंस गए ना! तो ये सारे के सारे जो हैं वो अपने ही बुने हुए जाल में अपने ही आप एक तरह से फंस गए हैं और इनको कोई रास्ता मिल नहीं रहा है। अब आ जाते हैं राहुल गांधी के ऊपर तो राहुल गांधी का Vietnam का तो मैंने आपको बता दिया कि उनको किस तरह से लताड़ सहनी पड़ी है। अब वो वापस आ रहे हैं और वापस आ रहे हैं और वापस आने के साथ-साथ 1 November का उनका एक घोषित कार्यक्रम है कि रामलीला मैदान में करेंगे। रामलीला मैदान में करने को एक तारीख को उनकी कोई भी unit राजी नहीं है। सब कह रहे हैं कि साहब अभी मत करो, Diwali के बाद करो। लोग बाग busy हैं, भीड़ हो नहीं पाएगी और उसके बाद फिर हमको नीचा देखना पड़ेगा। उसके अलावा एक और मुसीबत आ गई है कि एक तारीख को सिखों का नरसंहार किया था इन्हीं लोगों ने, कांग्रेसियों ने। तो लोग ये भी कह रहे हैं कि साहब ये मामला थोड़ा गड़बड़ है। पंजाब के चुनाव में मत करो अभी ये। तो वो भी खटाई में पड़ गया है। अब राहुल गांधी जिद्दी आदमी है। हो सकता है वो कहें नहीं-नहीं क्या करना पंजाब के चुनाव का? हमें कौन सा पंजाब का चुनाव जीतना है? पंजाब के चुनाव को मैं आपको आज सवेरे बता ही चुका हूँ कि पंजाब का चुनाव जो है वो अमित शाह ने दूसरी तरफ ही मोड़ दिया है और अमित शाह ने ये भी कह दिया है कि साहब की NDA सरकार बनाएगी। अब NDA सरकार बनाएगी इसका क्या संकेत है? इसका मतलब फिर अकालियों से भी कुछ बातचीत चल रही है और अकालियों से बातचीत में भी कोई सफलता मिलने की आशा है। ऐसा ही कुछ होगा। बाकी रही सही कसर यह हुई कि इतना हल्ला इन्होंने किया था वो Matthew VanDyke जो है वो वापस आकर court में पेश हो गया। उसने जो एक महीने की छुट्टी ली थी वो एक महीने की छुट्टी लेकर और वापस आकर court में पेश हो गया। यह एक बड़ी असंभव सी बात लगती है क्योंकि हमको जो है वो Italian Marines का भी experience है। लेकिन यहां तो ये वापस भी आ गए तो और भी कोई छोटे मोटे जो शिकवे शिकायत थे वो भी बंद हो गए। तो अब जो है वो मामला इन्होंने पलटने का प्रयास किया है आज। और पलटने के लिए ये फिर से China की तरफ गए। ये देखो China जो है वो लड़ाई कर रहा है और मोदी कुछ नहीं कर रहा है। अरे भैया तो रोज रोज goal post ना बदलो। ये मान लो सीधे-सीधे कि तुम्हारी protest industry fail हो गई है और China के बारे में जो कुछ भी बयान दिया है वो ITBP के Director General ने वो अपनी पीठ थपथपाते हुए दिया है। उसमें तुम कोई लोचा नहीं निकाल पाओगे। इसलिए थोड़ा ठंड पाओ और थोड़े दिनों के लिए आराम करो। सो जाओ। जय हिंद। जय भारत। वंदे मातरम।

राष्ट्रवादियों का महाकुंभ एक बार फिर से तैयार है और इसे पूरा करने के लिए हमें आपके सहयोग की आवश्यकता है। जयपुर dialogues Annual Summit में देशभर के राष्ट्रवादी धुरंधर एक मंच पर एकत्रित होते हैं और इसके लिए एक बड़ी आर्थिक राशि की आवश्यकता होती है। हमने एक सहयोग लक्ष्य तय किया है और इसे पूरा करवाने का दायित्व आपका है। Donate करें, support करें, इस राष्ट्रवादी मंच को और सुदृढ़ बनाएं। QR code screen पर दिया हुआ है और उसे scan करके आप अपना सहयोग दे सकते हैं। Support का link description में भी है। नमस्ते, आप सभी से अनुरोध है कृपया channel को subscribe करें video को like करें। आज हम बात करने जा रहे हैं protest industry के sudden collapse के बारे में। आपको पता है कितनी अच्छी protest industry चली थी। protest industry में लोगों ने जम-जम के पैसे कमाए। Reel वालों ने reel के पैसे कमाए और suppliers ने खाना खिलाने के लिए पैसे कमाए। biryani भी खिलाई गई और आपके burger भी खिलाए गए। सब कुछ हुआ। ये सब होते-होते होते-होते आज यह स्थिति है कि पूरी की पूरी जो protest industry है वो इधर-उधर भाग रही है। कारण बताऊं आपको क्या हुआ या यह बताऊं कि ऐसा मैं क्यों कह रहा हूँ। कुछ लोग यह कहेंगे कि भाई साहब आपका यह जो है यह अंदाजा या यह आपका जो conclusion है, निष्कर्ष है, यह premature है। लेकिन भाई मैं तो आज का देख रहा हूँ। यानी आज है 23 October। 23 October के दिन एक call हुई थी कि साहब आपको जो है वह सड़कों पर उतरना है। और इस call को देने वाले प्रमुख लोग थे प्रशांत भूषण उर्फ प्रदूषण या अशांत प्रदूषण भी कुछ लोग कहते हैं और पराकला प्रभाकर। यह पराकला प्रभाकर कौन है? आप सोचेंगे भाई यह पराकला प्रभाकर कौन है? तो पराकला प्रभाकर जो है, यह निर्मला सीताराम जी के पति हुआ करते थे। मैं इसलिए कह रहा हूँ हुआ करते थे क्योंकि वे लगभग मेरे ख्याल से 10-12 वर्ष से दोनों लोग जो है वह अलग-अलग हैं। यानी संभवतः निर्मला सीताराम जी के मंत्री बनने के पहले से पराकला प्रभाकर जी जो थे वह अलग हो गए थे। तो 23 October के मैंने आज की जो दिल्ली में बड़ा भारी प्रदर्शन होने वाला था और पूरे देश में जगह-जगह पर बड़ा प्रदर्शन होने वाला था, उसके लिए मैंने चारों तरफ बहुत प्रयास किया और ढूंढा कि कहीं कुछ मिल जाए, कहीं कुछ मिल जाए, पराकला प्रभाकर के नाम से कुछ मिल जाए, 23 October protest के नाम से कुछ मिल जाए, अशांत प्रदूषण उर्फ प्रशांत भूषण के नाम से कुछ मिल जाए। तो साहब एक छोटा सा video मिला। उसमें अशांत प्रदूषण जी जो है वह एक rally निकाले हैं। और वह rally जानते हैं कहाँ निकाले हैं। वह rally निकाल रहे हैं of all the places पालमपुर में। पालमपुर में rally निकालना है। और उसमें भी पालमपुर में जबकि उनका जो है वह बड़ा वहां पर एक संगठन है। वह संभावना Institute चलाते हैं। वह संभावना Institute में बहुत सारे जो हैं मेरे विचार से होंगे उसमें उनके employee भी होंगे और वहां पर जो enrolled जो trainees होंगे वो भी होंगे। इसके सबके बाद भी वहां मुश्किल से 50 लोग। मुश्किल से 50 लोग। अब बताइए आप इस प्रकार की rally यदि निकालेंगे अशांत प्रदूषण जी तो यह पूरी protest industry जो इतनी मुश्किल से फली-फूली है और बड़े-बड़े लोगों का इसको साथ मिला है। Neville Roy सिंघम वाला जो group है Deep State का, उसका पूरा साथ मिला हुआ है और उसने जो साथ में आपके विजय प्रसाद जैसे लोग या आपके सलील श्रीवास्तव शायद जैसे लोग जो Open Society के जो CEO थे, वो जो राजीव गांधी, राहुल गांधी के साथ में भारत जोड़ो यात्रा में साथ-साथ चल रहे थे। उन सबके होते हुए भी इस protest industry का यह हाल है। मुझे बताया गया है कि राहुल गांधी को बहुत कस के झाड़ लगी है। Soros ने बहुत झाड़ा है। मतलब Soros ने जिनको भी भेजा था अपना दूध बनाकर उसने बहुत झाड़ा और कहा कि तुम बिल्कुल जो है नाकारे हो, निकम्मे हो, नाकामयाब हो। कोई काम ढंग से नहीं कर सकते। पिछले 10 साल से हम तुमको support कर रहे हैं और एक बार भी तुम कुछ कर नहीं पाए। हर protest तुम्हारी fail है और भूल जाओ यहां तो उल्टा हो गया। हम तो चले थे यह कहने कि भाई किसी भी प्रकार से यह regime change हो जाए। यहां पर जो स्थिति बनी है उसमें नरेंद्र मोदी का समर्थन और बढ़ गया है। तो तुमने इस तरह की स्थिति बना दी कि तुमको पूरी समझ नहीं है और तुम इस तरह से काम करते हो। तुम्हारे पैसे cut! तो अब राहुल गांधी ने सुना है कि एक और आखिरी chance मांगा है कि नहीं, नहीं, नहीं, हमारे पैसे cut मत करो। दो-तीन billion dollar हमें 15 billion dollar और दे दो। उनका कोई 15 billion dollar नहीं। हम साले 15 million नहीं देंगे। क्या बात करते हो? अपने resources से कुछ करके बताओ नहीं तो फिर हमेशा के लिए हमारा-तुम्हारा रास्ता खत्म। और जो कुछ भी हम करेंगे वो हम Neville Roy सिंघम के जरिए करेंगे। जो Progressive International है उनकी, उस Progressive International के जरिए करेंगे। अब इसका impact क्या हुआ? यह तो पहली बात है। अब इसका impact यह हुआ था आपके माननीय श्री योगेंद्र यादव उर्फ सलीम उर्फ आंदोलनजीवी। वो आंदोलनजीवी जी कल चले गए अजीत अंजुम के YouTube पर और अजीत अंजुम के YouTube पर उन्होंने यह कह दिया कि भाई हमारा कोई regime change का इरादा नहीं था। मतलब यह regime change का जो शब्द है वो प्रशांत भूषण के मुंह से निकल गया। उसके बाद से यह पूरी की पूरी protest industry जो है ऐसा लगता है जैसे मानो coma में चली गई हो। अरे भाई, अगर आप regime change करना ही चाहते हो तो कह दो ना। तो यो या जो है। और सलीम वो कल यही कहते पाए गए। वो कहते पाए गए कि नहीं नहीं मैंने ऐसा जो है देखिए ये सब जो कुछ भी हम कर रहे हैं इसका अंतिम लक्ष्य तो यही है कि भाई आप जो है चुनाव में भाग लें और चुनाव में मतदान के जरिए regime change करें या चुनाव के जरिए सरकार को बदलें। इसका मतलब यही हो सकता है। इसका अन्य कोई मतलब हो ही नहीं सकता। वो भी पलट गए। ये वही है याद कीजिएगा। ये वही है कि भाई अब सारे फैसले संसद से नहीं सड़क से होंगे। और आज पलट कर क्या कह रहे हैं? 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हमें कौन सा पंजाब का चुनाव जीतना है? पंजाब के चुनाव को मैं आपको आज सवेरे बता ही चुका हूँ कि पंजाब का चुनाव जो है वो अमित शाह ने दूसरी तरफ ही मोड़ दिया है और अमित शाह ने ये भी कह दिया है कि साहब की NDA सरकार बनाएगी। अब NDA सरकार बनाएगी इसका क्या संकेत है? इसका मतलब फिर अकालियों से भी कुछ बातचीत चल रही है और अकालियों से बातचीत में भी कोई सफलता मिलने की आशा है। ऐसा ही कुछ होगा। बाकी रही सही कसर यह हुई कि इतना हल्ला इन्होंने किया था वो Matthew VanDyke जो है वो वापस आकर court में पेश हो गया। उसने जो एक महीने की छुट्टी ली थी वो एक महीने की छुट्टी लेकर और वापस आकर court में पेश हो गया। यह एक बड़ी असंभव सी बात लगती है क्योंकि हमको जो है वो Italian Marines का भी experience है। लेकिन यहां तो ये वापस भी आ गए तो और भी कोई छोटे मोटे जो शिकवे शिकायत थे वो भी बंद हो गए। तो अब जो है वो मामला इन्होंने पलटने का प्रयास किया है आज। और पलटने के लिए ये फिर से China की तरफ गए। ये देखो China जो है वो लड़ाई कर रहा है और मोदी कुछ नहीं कर रहा है। अरे भैया तो रोज रोज goal post ना बदलो। ये मान लो सीधे-सीधे कि तुम्हारी protest industry fail हो गई है और China के बारे में जो कुछ भी बयान दिया है वो ITBP के Director General ने वो अपनी पीठ थपथपाते हुए दिया है। उसमें तुम कोई लोचा नहीं निकाल पाओगे। इसलिए थोड़ा ठंड पाओ और थोड़े दिनों के लिए आराम करो। सो जाओ। जय हिंद। जय भारत। वंदे मातरम।