ओम शांति। आज 8 October 2026 बाबा के महावाक्य हैं। मीठे बच्चे तुम्हें अब आवाज से परे जाना है इसलिए मुख से शिव शिव कहने की भी दरकार नहीं है। प्रश्न है एक बाप को ही सर्वशक्तिमान ज्ञान का सागर कहेंगे दूसरों को नहीं। क्यों? उत्तर है क्योंकि एक बाप को ही याद करने से आत्मा पतित से पावन बन जाती है। बाप ही है जो पतितों को पावन बना देते हैं। बाकी कोई भी देहधारी मनुष्य पावन बना नहीं सकते। बाप तुम्हें रावण राज्य से मुक्त कर देते हैं। तुम शिव बाबा से शक्ति लेते हो। जितना ज्यादा याद करेंगे उतना शक्ति मिलेगी और खाद निकलती जाएगी। गीत है ओम नमो शिवाय। ओम नमो शिवाय। तुम मात सहायक स्वामी सखा, तुम ही सबके रखवारे हो। जिसका कोई आधार नहीं, उसके तुम एक सहारे हो। तुम मात सहायक स्वामी सखा, तुम ही सबके रखवारे हो। ओम शांति। मीठे मीठे सिकिलदे बच्चों ने भक्ति की महिमा सुनी। तुम भी महिमा गाते थे। अब महिमा नहीं गाते हो और ना तुम्हारे लिए महिमा की जरूरत है। जो भगत करते हैं वह तुम बच्चे नहीं कर सकते हो। तुम भगत थे। अब तुमको भगवान मिला है। सबको इकट्ठा तो मिल नहीं सकता है। बाप सबको इकट्ठा कैसे पढ़ाए? यह तो हो नहीं सकता। सभी भगत भी इकट्ठे नहीं हो सकते। हां, बाप को पढ़ाना है जरूर, क्योंकि यह राजयोग है। सूर्यवंशी चंद्रवंशी राज्य स्थापन होना है। बच्चों को प्रदर्शनी में समझाना है। त्योहारों आदि पर भी तुम बहुत अच्छी service कर सकते हो। तुम्हें अपने लिए ही राज्य स्थापन करना है। तुम शिवशक्ति महारथी सेना हो और कोई ड्रिल आदि तुम नहीं सीखते हो। तुम रूहानी ड्रिल सीखते हो। यह ड्रिल भारत की नामी ग्रामी है। यह है योग की ड्रिल। आत्मा को परमपिता परमात्मा से योग लगाना है। उनसे वर्षा लेना है। इसमें लड़ाई की कोई बात नहीं। तुम बाप से वर्षा लेते हो। इसमें लड़ाई का connection नहीं है। तुम हो बेहद बाप के वारिस तो बाप का बनकर बाप की श्रीमत पर चलना है। बाप की मत लड़ाई आदि की नहीं है। बाप सिर्फ कहते हैं मीठे मीठे बच्चे। तुम सतप्रधान थे, राज्य करते थे। अब तुमको स्मृति आई है। बाप कहते हैं तुम अपने जन्मों को नहीं जानते हो। गाते भी हैं। 84 जन्म मनुष्य लेते हैं 84 लाख। यह तो गपोडे हैं। भक्ति मार्ग में जिसको जो आया सो पढ़ते रहते हैं। धर्मावतार यह भक्ति मार्ग की सामग्री है। सतयुग त्रेता में भक्ति होती नहीं। भक्ति अलग है, ज्ञान अलग है। तुम बच्चों के सिवाय और कोई ऋषि मुनि आदि की बुद्धि में यह ज्ञान नहीं है। उन्हें को यह भी मालूम नहीं कि सुख अलग है। दुख अलग है। सुख बाप देते हैं, दुख रावण देते हैं। जो तुम सूर्यवंशी चंद्रवंशी थे, सो 84 का चक्र लगाकर शूद्र वंशी बने। बाप स्मृति दिलाते हैं तुम विश्व के मालिक थे। तुम 84 जन्म भोग नीचे उतरते तुच्छ बुद्धि तमोप्रधान बन गए हो। सतप्रधान वाले को स्वच्छ उच्च बुद्धि कहा जाता है। तमोप्रधान को नीच बुद्धि कहा जाता है। नीच बुद्धि वाले उच्च बुद्धि वालों को नमस्ते करते हैं। यह तुमको भी मालूम नहीं था कि हम ही उच्च थे। अब हम ही नीच बने हैं। बाबा ने समझाया है जिसने पहले number में जन्म लिया होगा, वही सतप्रधान बनेगा। 84 जन्म भी सूर्यवंशी ही लेंगे। अब तुम समझते हो, हम विश्व के मालिक थे तो पावन सतप्रधान थे। पतित थोड़े ही विश्व के मालिक बन सकते हैं। उनकी महिमा देखो कितनी ऊंची है। सर्वगुण संपन्न। त्रेता में 14 कला संपूर्ण नहीं कहेंगे। सूर्यवंशी को 16 कला संपूर्ण कहेंगे। 14 कला के पीछे संपूर्ण अक्षर नहीं आएगा। संपूर्ण 16 कला वालों को लिखना है। अभी तुम बच्चे 16 कला संपूर्ण बनते हो। यह भी बच्चों को समझाया है कि यह ज्ञान अति सहज है। इससे सहज कोई बात होती नहीं। बाबा रहम दिल है ना। बाबा जानते हैं बच्चे भक्ति में धक्के खा-खाकर थक गए होंगे इसलिए दिखाया है द्रौपदी के पांव दबाई। बाबा के पास बूढ़ी-बूढ़ी माताएं आती हैं। बाबा कहते हैं, "तुम भक्ति के धक्के खाकर थके हुए हो, इसलिए बाबा अभी तुम्हारी थक सब दूर कर देते हैं।" भक्ति में राम नाम जपते, माला फेरते रहते हैं। बाबा का पादरियों से भी संपर्क रहा है। पादरी भी बाइबल लेकर बैठ समझाते रहते हैं। बहुत Christian बन जाते हैं। यहां माला आदि फेरने की बात नहीं। बाप कहते हैं, "अपने को आत्मा समझ बाबा को याद करो।" शिव शिव मुख से कहना नहीं है। हम तो आवाज से परे जाने वाले हैं। बाबा बहुत सहज युक्ति बताते हैं कि मुझे याद करो तो खाद निकल जाए और गृहस्थ व्यवहार में रहते पवित्र बनना है। कमल फूल बड़ा नामी-ग्रामी है। उनकी बड़ी पंचायत होती है परंतु फिर भी न्यारा और प्यारा रहता है। तुम भी विषय सागर में रहते न्यारे प्यारे रहो। यह विषय सागर है। इसको नदी नहीं कहेंगे। तुम बच्चे अभी कितना समझदार बनते हो। इसी समझ से तुम महाराज कुमार बन जाते हो। तुमको तो बहुत खुशी होनी चाहिए। पुरुषार्थ करना चाहिए। बच्चा अथवा बच्ची दोनों की आत्मा को पुरुषार्थ करना है। लौकिक संबंध में बाप का वर्षा सिर्फ बच्चों को मिलता है, बच्ची को नहीं। यहां सब आत्माओं को वर्षा मिलता है। बाप समझाते हैं, याद की यात्रा से ही तुम उच्च पद पा सकते हो। प्रदर्शनी में पहले-पहले बाप का परिचय देना है। फिर उनके बाद है बाप का वर्षा। पहले यह निश्चय बैठाऊं कि यह तुम्हारा बेहद का बाप है। उनको समझाना है भगवान एक है। ब्रह्मा, विष्णु, शंकर भी भगवान नहीं है, देवता है। भगवान पतित पावन निराकार बाप है। उनकी महिमा ही अलग है। आजकल प्रदर्शनी में त्रिमूर्ति पर समझाना होता है। वह बाप, यह दादा। वर्षा उनसे मिलता है। वह निराकार है। उनसे वर्षा कैसे मिले? वह है सबका रचैता। ब्रह्मा, विष्णु, शंकर भी रचना है। रचना को रचता से ही वर्षा मिल सकता है। वह तो निराकार बाप इस द्वारा वर्षा देते हैं। रचता सबका एक है इसलिए गाया जाता है सर्वका सद्गति दाता एक। उसको ज्ञान सागर कहा जाता है। बाकी वह सब शास्त्रों की authority है। यह है ज्ञान सागर खुद authority। World Almighty Authority खुद कहती हैं कि मैं वेदों शास्त्रों को जानता हूं और तुमको सार समझाता हूं। यह सब है भक्ति मार्ग की सामग्री जो सतयुग, त्रेता में होती नहीं। भक्ति से ही सीढ़ी नीचे उतरनी होती है। सर्वशक्तिमान एक बाप को ही गाया जाता है। उनके साथ योग लगाने से ही हम पवित्र बन जाते हैं। तो सर्वशक्तिमान हुआ ना। हम सबको पतित से पावन बना देते हैं। रावण राज जैसे मुक्त कर देते हैं। तुम अब शिव बाबा से शक्ति ले रहे हो। जितना ज्यास्ती याद करेंगे उतना शक्ति मिलेगी और खाद निकल जाएगी। तुमको दिन रात यही फुरना रहना चाहिए कि पतित से पावन, तमोप्रधान से सतओप्रधान बन जाएं। माया के तूफान आएंगे। बाबा कहते हैं, "खबरदार रहना चाहिए।" तुम्हारी माया के साथ युद्ध है। फालतू विकल्प बहुत आएंगे। जो कभी अज्ञान में नहीं आए होंगे, वह भी आएंगे। तुम युद्ध के मैदान में हो। मेहनत सारी याद की यात्रा में है। भारत का योग नामी-ग्रामी है। योग के लिए ही बाबा समझाते हैं कि तुम अपने को आत्मा समझ बाप को याद करो। ऐसे और कोई मनुष्य समझा ना सके। वह कह देते हैं सब भगवान के रूप हैं। जिधर देखता हूं परमात्मा ही परमात्मा है। बाप समझाते हैं तुम आत्मा हो, चौरासी जन्म भोगते हो। अगर सब परमात्मा है तो क्या परमात्मा जन्म-मरण के चक्र में आते हैं? आत्मा एक शरीर छोड़ दूसरा लेती है। आत्मा में अच्छे-बुरे संस्कार रहते हैं। अच्छे संस्कार वालों की महिमा गाते हैं। बुरे संस्कार वालों को कहते हैं पापी, नीच। बाबा पवित्र बनने की सहज युक्ति बताते हैं मनसा, वाचा, कर्मणा किसको दुख नहीं देना है। अपने को भी दुख नहीं देना है। कोई भी विकर्म चोरी आदि नहीं करना चाहिए। अगर कहां झूठ बोलना पड़ता है तो बाबा से राय पूछो। सबसे बड़ा पाप है कामकटारी चलाना। वह मत चलाओ। बाप कहते हैं बच्चे हाथों से काम करते बुद्धि का योग मेरे से लगाओ। हथ कारडे बुद्धि जारडे। बाबा सर्जन भी है। सबकी बीमारी एक जैसी हो ना सके। कर्म भी एक जैसे हो ना सके तो कदम-कदम पर पूछना चाहिए। मंजिल बड़ी भारी है। अमरनाथ की यात्रा पर जाते हैं तो कहते हैं अमरनाथ की जय। बद्रीनाथ की जय। हे बद्रीनाथ हमारी रक्षा करना। अब तुमको तीर्थयात्रा आदि कुछ नहीं करना है। यह ज्ञान की बातें बाप ही समझाते हैं। उनका ही पाठ है। तुम भी बाबा के साथ-साथ पाठधारी हो। जितना जो पढ़ेगा उतना उच्च पद मिलेगा। इसमें कोई की बड़ाई नहीं। बड़ाई एक की ही है जो सर्व मनुष्यों को सद्गति देता है। सर्व बच्चों को पतित से पावन बनाते हैं। ड्रामा में मुझे भी पाठ मिला हुआ है। पांच तत्वों को भी अपना-अपना पाठ मिला हुआ है। सु बचाना है। धरती को पुथल ना है, विनाश होना है। तुम्हारा भी ड्रामा में पाठ है। इसमें बड़ाई क्या है? राज्य करते-करते पतित बन गए। तुम भी पहले क्या थे? worth not a penny.
ओम शांति। आज 8 October 2026 बाबा के महावाक्य हैं। मीठे बच्चे तुम्हें अब आवाज से परे जाना है इसलिए मुख से शिव शिव कहने की भी दरकार नहीं है। प्रश्न है एक बाप को ही सर्वशक्तिमान ज्ञान का सागर कहेंगे दूसरों को नहीं। क्यों? उत्तर है क्योंकि एक बाप को ही याद करने से आत्मा पतित से पावन बन जाती है। बाप ही है जो पतितों को पावन बना देते हैं। बाकी कोई भी देहधारी मनुष्य पावन बना नहीं सकते। बाप तुम्हें रावण राज्य से मुक्त कर देते हैं। तुम शिव बाबा से शक्ति लेते हो। जितना ज्यादा याद करेंगे उतना शक्ति मिलेगी और खाद निकलती जाएगी। गीत है ओम नमो शिवाय। ओम नमो शिवाय। तुम मात सहायक स्वामी सखा, तुम ही सबके रखवारे हो। जिसका कोई आधार नहीं, उसके तुम एक सहारे हो। तुम मात सहायक स्वामी सखा, तुम ही सबके रखवारे हो। ओम शांति। मीठे मीठे सिकिलदे बच्चों ने भक्ति की महिमा सुनी। तुम भी महिमा गाते थे। अब महिमा नहीं गाते हो और ना तुम्हारे लिए महिमा की जरूरत है। जो भगत करते हैं वह तुम बच्चे नहीं कर सकते हो। तुम भगत थे। अब तुमको भगवान मिला है। सबको इकट्ठा तो मिल नहीं सकता है। बाप सबको इकट्ठा कैसे पढ़ाए? यह तो हो नहीं सकता। सभी भगत भी इकट्ठे नहीं हो सकते। हां, बाप को पढ़ाना है जरूर, क्योंकि यह राजयोग है। सूर्यवंशी चंद्रवंशी राज्य स्थापन होना है। बच्चों को प्रदर्शनी में समझाना है। त्योहारों आदि पर भी तुम बहुत अच्छी service कर सकते हो। तुम्हें अपने लिए ही राज्य स्थापन करना है। तुम शिवशक्ति महारथी सेना हो और कोई ड्रिल आदि तुम नहीं सीखते हो। तुम रूहानी ड्रिल सीखते हो। यह ड्रिल भारत की नामी ग्रामी है। यह है योग की ड्रिल। आत्मा को परमपिता परमात्मा से योग लगाना है। उनसे वर्षा लेना है। इसमें लड़ाई की कोई बात नहीं। तुम बाप से वर्षा लेते हो। इसमें लड़ाई का connection नहीं है। तुम हो बेहद बाप के वारिस तो बाप का बनकर बाप की श्रीमत पर चलना है। बाप की मत लड़ाई आदि की नहीं है। बाप सिर्फ कहते हैं मीठे मीठे बच्चे। तुम सतप्रधान थे, राज्य करते थे। अब तुमको स्मृति आई है। बाप कहते हैं तुम अपने जन्मों को नहीं जानते हो। गाते भी हैं। 84 जन्म मनुष्य लेते हैं 84 लाख। यह तो गपोडे हैं। भक्ति मार्ग में जिसको जो आया सो पढ़ते रहते हैं। धर्मावतार यह भक्ति मार्ग की सामग्री है। सतयुग त्रेता में भक्ति होती नहीं। भक्ति अलग है, ज्ञान अलग है। तुम बच्चों के सिवाय और कोई ऋषि मुनि आदि की बुद्धि में यह ज्ञान नहीं है। उन्हें को यह भी मालूम नहीं कि सुख अलग है। दुख अलग है। सुख बाप देते हैं, दुख रावण देते हैं। जो तुम सूर्यवंशी चंद्रवंशी थे, सो 84 का चक्र लगाकर शूद्र वंशी बने। बाप स्मृति दिलाते हैं तुम विश्व के मालिक थे। तुम 84 जन्म भोग नीचे उतरते तुच्छ बुद्धि तमोप्रधान बन गए हो। सतप्रधान वाले को स्वच्छ उच्च बुद्धि कहा जाता है। तमोप्रधान को नीच बुद्धि कहा जाता है। नीच बुद्धि वाले उच्च बुद्धि वालों को नमस्ते करते हैं। यह तुमको भी मालूम नहीं था कि हम ही उच्च थे। अब हम ही नीच बने हैं। बाबा ने समझाया है जिसने पहले number में जन्म लिया होगा, वही सतप्रधान बनेगा। 84 जन्म भी सूर्यवंशी ही लेंगे। अब तुम समझते हो, हम विश्व के मालिक थे तो पावन सतप्रधान थे। पतित थोड़े ही विश्व के मालिक बन सकते हैं। उनकी महिमा देखो कितनी ऊंची है। सर्वगुण संपन्न। त्रेता में 14 कला संपूर्ण नहीं कहेंगे। सूर्यवंशी को 16 कला संपूर्ण कहेंगे। 14 कला के पीछे संपूर्ण अक्षर नहीं आएगा। संपूर्ण 16 कला वालों को लिखना है। अभी तुम बच्चे 16 कला संपूर्ण बनते हो। यह भी बच्चों को समझाया है कि यह ज्ञान अति सहज है। इससे सहज कोई बात होती नहीं। बाबा रहम दिल है ना। बाबा जानते हैं बच्चे भक्ति में धक्के खा-खाकर थक गए होंगे इसलिए दिखाया है द्रौपदी के पांव दबाई। बाबा के पास बूढ़ी-बूढ़ी माताएं आती हैं। बाबा कहते हैं, "तुम भक्ति के धक्के खाकर थके हुए हो, इसलिए बाबा अभी तुम्हारी थक सब दूर कर देते हैं।" भक्ति में राम नाम जपते, माला फेरते रहते हैं। बाबा का पादरियों से भी संपर्क रहा है। पादरी भी बाइबल लेकर बैठ समझाते रहते हैं। बहुत Christian बन जाते हैं। यहां माला आदि फेरने की बात नहीं। बाप कहते हैं, "अपने को आत्मा समझ बाबा को याद करो।" शिव शिव मुख से कहना नहीं है। हम तो आवाज से परे जाने वाले हैं। बाबा बहुत सहज युक्ति बताते हैं कि मुझे याद करो तो खाद निकल जाए और गृहस्थ व्यवहार में रहते पवित्र बनना है। कमल फूल बड़ा नामी-ग्रामी है। उनकी बड़ी पंचायत होती है परंतु फिर भी न्यारा और प्यारा रहता है। तुम भी विषय सागर में रहते न्यारे प्यारे रहो। यह विषय सागर है। इसको नदी नहीं कहेंगे। तुम बच्चे अभी कितना समझदार बनते हो। इसी समझ से तुम महाराज कुमार बन जाते हो। तुमको तो बहुत खुशी होनी चाहिए। पुरुषार्थ करना चाहिए। बच्चा अथवा बच्ची दोनों की आत्मा को पुरुषार्थ करना है। लौकिक संबंध में बाप का वर्षा सिर्फ बच्चों को मिलता है, बच्ची को नहीं। यहां सब आत्माओं को वर्षा मिलता है। बाप समझाते हैं, याद की यात्रा से ही तुम उच्च पद पा सकते हो। प्रदर्शनी में पहले-पहले बाप का परिचय देना है। फिर उनके बाद है बाप का वर्षा। पहले यह निश्चय बैठाऊं कि यह तुम्हारा बेहद का बाप है। उनको समझाना है भगवान एक है। ब्रह्मा, विष्णु, शंकर भी भगवान नहीं है, देवता है। भगवान पतित पावन निराकार बाप है। उनकी महिमा ही अलग है। आजकल प्रदर्शनी में त्रिमूर्ति पर समझाना होता है। वह बाप, यह दादा। वर्षा उनसे मिलता है। वह निराकार है। उनसे वर्षा कैसे मिले? वह है सबका रचैता। ब्रह्मा, विष्णु, शंकर भी रचना है। रचना को रचता से ही वर्षा मिल सकता है। वह तो निराकार बाप इस द्वारा वर्षा देते हैं। रचता सबका एक है इसलिए गाया जाता है सर्वका सद्गति दाता एक। उसको ज्ञान सागर कहा जाता है। बाकी वह सब शास्त्रों की authority है। यह है ज्ञान सागर खुद authority। World Almighty Authority खुद कहती हैं कि मैं वेदों शास्त्रों को जानता हूं और तुमको सार समझाता हूं। यह सब है भक्ति मार्ग की सामग्री जो सतयुग, त्रेता में होती नहीं। भक्ति से ही सीढ़ी नीचे उतरनी होती है। सर्वशक्तिमान एक बाप को ही गाया जाता है। उनके साथ योग लगाने से ही हम पवित्र बन जाते हैं। तो सर्वशक्तिमान हुआ ना। हम सबको पतित से पावन बना देते हैं। रावण राज जैसे मुक्त कर देते हैं। तुम अब शिव बाबा से शक्ति ले रहे हो। जितना ज्यास्ती याद करेंगे उतना शक्ति मिलेगी और खाद निकल जाएगी। तुमको दिन रात यही फुरना रहना चाहिए कि पतित से पावन, तमोप्रधान से सतओप्रधान बन जाएं। माया के तूफान आएंगे। बाबा कहते हैं, "खबरदार रहना चाहिए।" तुम्हारी माया के साथ युद्ध है। फालतू विकल्प बहुत आएंगे। जो कभी अज्ञान में नहीं आए होंगे, वह भी आएंगे। तुम युद्ध के मैदान में हो। मेहनत सारी याद की यात्रा में है। भारत का योग नामी-ग्रामी है। योग के लिए ही बाबा समझाते हैं कि तुम अपने को आत्मा समझ बाप को याद करो। ऐसे और कोई मनुष्य समझा ना सके। वह कह देते हैं सब भगवान के रूप हैं। जिधर देखता हूं परमात्मा ही परमात्मा है। बाप समझाते हैं तुम आत्मा हो, चौरासी जन्म भोगते हो। अगर सब परमात्मा है तो क्या परमात्मा जन्म-मरण के चक्र में आते हैं? आत्मा एक शरीर छोड़ दूसरा लेती है। आत्मा में अच्छे-बुरे संस्कार रहते हैं। अच्छे संस्कार वालों की महिमा गाते हैं। बुरे संस्कार वालों को कहते हैं पापी, नीच। बाबा पवित्र बनने की सहज युक्ति बताते हैं मनसा, वाचा, कर्मणा किसको दुख नहीं देना है। अपने को भी दुख नहीं देना है। कोई भी विकर्म चोरी आदि नहीं करना चाहिए। अगर कहां झूठ बोलना पड़ता है तो बाबा से राय पूछो। सबसे बड़ा पाप है कामकटारी चलाना। वह मत चलाओ। बाप कहते हैं बच्चे हाथों से काम करते बुद्धि का योग मेरे से लगाओ। हथ कारडे बुद्धि जारडे। बाबा सर्जन भी है। सबकी बीमारी एक जैसी हो ना सके। कर्म भी एक जैसे हो ना सके तो कदम-कदम पर पूछना चाहिए। मंजिल बड़ी भारी है। अमरनाथ की यात्रा पर जाते हैं तो कहते हैं अमरनाथ की जय। बद्रीनाथ की जय। हे बद्रीनाथ हमारी रक्षा करना। अब तुमको तीर्थयात्रा आदि कुछ नहीं करना है। यह ज्ञान की बातें बाप ही समझाते हैं। उनका ही पाठ है। तुम भी बाबा के साथ-साथ पाठधारी हो। जितना जो पढ़ेगा उतना उच्च पद मिलेगा। इसमें कोई की बड़ाई नहीं। बड़ाई एक की ही है जो सर्व मनुष्यों को सद्गति देता है। सर्व बच्चों को पतित से पावन बनाते हैं। ड्रामा में मुझे भी पाठ मिला हुआ है। पांच तत्वों को भी अपना-अपना पाठ मिला हुआ है। सु बचाना है। धरती को पुथल ना है, विनाश होना है। तुम्हारा भी ड्रामा में पाठ है। इसमें बड़ाई क्या है? राज्य करते-करते पतित बन गए। तुम भी पहले क्या थे? worth not a penny.
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